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| चित्र साभार गूगल |
एक प्रेमगीत-अच्छा सा मौसम हो
शीशे की
खिड़की में
कोई तुमसा दिखता हो।
अच्छा सा
मौसम हो
कोई कविता लिखता हो।
नाव वहीं हो
गंगा-जमुना
मिली जहाँ हँसकर,
एक अजनबी
डरकर बाहों में
जकड़े कसकर,
नज़र झुकाए
कोई हँसकर
नीचे तकता हो ।
बेमौसम
बारिश हो
भींगे फूलों पर तितली,
आँखों में
काजल,सावन हो
होठों पर कजली,
झीलों में
डूबा-उतराता
सूरज दिखता हो ।
नुक्कड़-नुक्कड़
काशी
मुँह में पान दबाए हो,
कोई जुड़े में
फूलों का
लॉन सजाए हो,
अपना ही
श्रृंगार देखकर
दरपन हँसता हो ।
कवि-जयकृष्ण राय तुषार
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