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Thursday, 20 October 2022

एक लोकभाषा गीत -दीपावली

चित्र साभार गूगल 

मित्रों आप सभी को प्रकाश पर्व दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें

गीत पुराना है 


एक लोकभाषा गीत -देश में अब हमेशा अजोरिया रहै 


ई चनरमा रहै ,

ना अन्हरिया रहै |

देश में हमरे 

हर दिन अजोरिया रहै |


सबके घर से अँधेरा 

मिटावै के बा ,

सबके देहरी रंगोली 

सजावै के बा ,

धूप खुलि के हंसै

ना बदरिया रहै |


झील में फूल सुन्दर 

कँवल कै खिलै ,

सब ठठाके हंसै

जब केहू से मिलै

हर सुहागन क 

चुनरी लहरिया रहै |


वीर सीमा प देशवा 

क रक्षा करैं ,

गाँव कै लोग खेती से 

अन -धन भरैं ,

गुड़ खियावत अतिथि के 

ओसरिया रहै |


पर्व -उत्सव से नाता 

न टूटै कभी ,

हाथ पकड़ीं त 

फिर -फिर न छूटै कभी ,

ई दीवाली रहै 

ई झलरिया रहै |

कवि जयकृष्ण राय तुषार

चित्र साभार गूगल 



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