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| माननीय प्रधानमंत्री मोदी जी |
एक गीत -बजता सुन्दर इकतारा है
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| चित्र साभार गूगल |
(कृपया बिना अनुमति के इस ब्लॉग में प्रकाशित किसी भी अंश का किसी भी तरह से उपयोग न करें)
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| माननीय प्रधानमंत्री मोदी जी |
एक गीत -बजता सुन्दर इकतारा है
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| चित्र साभार गूगल |
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| चित्र साभार गूगल |
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| स्मृतिशेष कथा लेखिका उषाकिरण खां |
इस ग़ज़ल के मतले का शेर कथा लेखिका उषाकिरण खां को समर्पित है
एक ग़ज़ल -मैंने दिल से कुछ कहा
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| चित्र साभार गूगल |
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| चित्र साभार गूगल |
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| संगम शाही स्नान चित्र साभार गूगल |
आज मौनी अमावस्या का पावन स्नान पर्व है सभी कल्पवासियों, स्नानर्थियों को शुभकामनायें.माँ गंगा, यमुना, सरस्वती सबका कल्याण करें.
एक पुरानी ग़ज़ल
फक़ीरों की तरह धूनी रमाकर देखिए साहब
तबीयत से यहाँ गंगा नहाकर देखिए साहब
यहाँ पर जो सुंकू है वो कहाँ है भव्य महलों में
ये संगम है यहाँ तम्बू लगाकर देखिए साहब
हथेली पर उतर आयेंगे ये संगम की लहरों से
मोहब्बत से परिंदो को बुलाकर देखिए साहब
ये गंगा फिर बहेगी तोड़कर मजबूत चट्टानें
जो कचरा आपने फेंका हटाकर देखिए साहब
कवि /शायर
जयकृष्ण राय तुषार
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| चित्र साभार गूगल |
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| चित्र साभार गूगल |
एक गीत -मन की खुशबू कहाँ पुरानी होती है
मन की
खुशबू कहाँ
पुरानी होती है.
चित्रों की
भी प्रेम -
कहानी होती है.
फूल नहीं
देखा
खुशबू पहचान गया,
भौँरा
जंगल, बस्ती
सबको जान गया,
फागुन की
हर शाम
सुहानी होती है.
वंशी की
आवाज़
नदी की लहरों में,
अक्सर
चाँद रहा
मेघोँ के पहरों में,
आँखों की
भी बोली
बानी होती है.
पहली-
पहली भेंट
युगों के किस्से हैं '
धूप -छाँह
सुख दुःख
जीवन के हिस्से हैं,
किस्मत वाली
बिटिया
रानी होती है.
कवि /गीतकार
जयकृष्ण राय तुषार
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| चित्र साभार गूगल |
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| प्रभु श्रीराम अयोध्या |
एक ग़ज़ल -
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| राष्ट्र धर्म फ़रवरी अंक में प्रकाशित |
दौलत, शोहरत, ओहदा सब बेकार गया
जिसकी किस्मत वही राम दरबार गया
इफ़्तारी में शामिल हिन्दू घर बैठे
राम के दर पर असली रोज़ेदार गया
ईश्वर कैसे मिलता जीवन यात्रा में
सैलानी बनकर बद्री -केदार गया
रामलला की मूर्ति मनोहर, अप्रतिम है
इसे देखने प्रभु का हर अवतार गया
धर्म, राष्ट्र को किया प्रतिष्ठित सम्मानित
जिस नगरी में अपना चौकीदार गया
रामकाज में जो शहीद हैं कोटि नमन
उन्हें निमंत्रण बिना तार उस पार गया
सरयू के तट पर हर मत हर फिरक़ा था
कुछ लोगों के नफ़रत का बाज़ार गया
कवि /शायर
जयकृष्ण राय तुषार
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| अयोध्या प्रभु श्रीराम की प्राण प्रतिष्ठा |
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| प्रभु श्रीराम |
जय श्रीराम
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| श्रीराम |
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| श्रीराम जी बाल रूप में |
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| दैनिक हिंदुस्तान में 21 जनवरी को प्रकाशित |
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| चित्र साभार गूगल |
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| चित्र साभार गूगल |
एक पुरानी ग़ज़ल
एक गज़ल -फूल से मिलना तो फूलों सी तबीयत रखना
खार से रिश्ता भले खार की सूरत रखना
फूल से मिलना तो फूलों सी तबीयत रखना
जब भी तकसीम किया जाता है हँसते घर को
सीख जाते हैं ये बच्चे भी अदावत रखना
हम किसे चूमें किसे सीने पे रखकर रोयें
दौर -ए -ईमेल में मुमकिन है कहाँ खत रखना
जिन्दगी बाँह में बांधा हुआ तावीज नहीं
गर मिली है तो इसे जीने की कूवत रखना
रेशमी जुल्फ़ें ,ये ऑंखें ,ये हँसी के झरने
किस अदाकार से सीखा ये मुसीबत रखना
चाहता है जो तू दरिया से समन्दर होना
अपना अस्तित्व मिटा देने की फितरत रखना
जिसके सीने में सच्चाई के सिवा कुछ भी नहीं
उसके होठों पे उँगलियों को कभी मत रखना
जब उदासी में कभी दोस्त भी अच्छे न लगें
कैद -ए -तनहाई की इस बज्म में आदत रखना
इसको सैलाब भी रोके तो कहाँ रुकता है
इश्क की राह, न दीवार, न ही छत रखना
[ मेरी यह ग़ज़ल नया ज्ञानोदय के ग़ज़ल महाविशेषांक एवं हिन्दी की बेहतरीन ग़ज़लें -सम्पादक भारतीय ज्ञानपीठ में प्रकाशित है ]
चित्र -गूगल से साभार
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| प्रभु श्रीराम |
एक भक्ति गीत -श्रीराम हूँ मैं
चारो युग, चारो वेद सृष्टि
संतों का सुख अभिराम हूँ मैं
मैं सदा धर्म का रक्षक हूँ
त्रेता युग का श्रीराम हूँ मैं
इस लोक में मैं लीलाधर हूँ
द्वापर का मुरलीवाला हूँ
सतयुग का वामन ब्राह्मण हूँ
मैं परशुराम की ज्वाला हूँ
गंगा यमुना मेरे पग में
सरयू का पावन धाम हूँ मैं
मैं बाल्मीकि के छंदों में
मैं तुलसी की चौपाई हूँ
मैं कर्म ज्ञान हूँ गीता का
मैं सीतापति रघुराई हूँ
जिस जगह निरंकुश पाप बढ़े
उस धरती पर संग्राम हूँ मैं
सब भक्त मुझे पा जाते हैं
मैं भक्तों का उद्धारक हूँ
बस अहंकार भोजन मेरा
मैं रावण का संहारक हूँ
मैं आदि, अनंत, अजन्मा हूँ
निर्गुण भी सगुण निष्काम हूँ मैं
चित्र साभार गूगल एक पुराना लोकभाषा गीत लोकसंस्कृति, गाँव की रौनक़, उत्सवजीविता को, लोकपरम्परा को याद करती लोकभाषा कविता.सादर अभिवादन सहित...