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प्रभु श्रीराम |
एक भक्ति गीत -श्रीराम हूँ मैं
चारो युग, चारो वेद सृष्टि
संतों का सुख अभिराम हूँ मैं
मैं सदा धर्म का रक्षक हूँ
त्रेता युग का श्रीराम हूँ मैं
इस लोक में मैं लीलाधर हूँ
द्वापर का मुरलीवाला हूँ
सतयुग का वामन ब्राह्मण हूँ
मैं परशुराम की ज्वाला हूँ
गंगा यमुना मेरे पग में
सरयू का पावन धाम हूँ मैं
मैं बाल्मीकि के छंदों में
मैं तुलसी की चौपाई हूँ
मैं कर्म ज्ञान हूँ गीता का
मैं सीतापति रघुराई हूँ
जिस जगह निरंकुश पाप बढ़े
उस धरती पर संग्राम हूँ मैं
सब भक्त मुझे पा जाते हैं
मैं भक्तों का उद्धारक हूँ
बस अहंकार भोजन मेरा
मैं रावण का संहारक हूँ
मैं आदि, अनंत, अजन्मा हूँ
निर्गुण भी सगुण निष्काम हूँ मैं
बहुत सुंदर
ReplyDeleteहार्दिक आभार आपका
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