Monday, 8 January 2024

एक भक्ति गीत -त्रेता का श्रीराम हूँ मैं

प्रभु श्रीराम 


एक भक्ति गीत -श्रीराम हूँ मैं


चारो युग, चारो वेद सृष्टि

संतों का सुख अभिराम हूँ मैं

मैं सदा धर्म का रक्षक हूँ

त्रेता युग का श्रीराम हूँ मैं


इस लोक में मैं लीलाधर हूँ 

द्वापर का मुरलीवाला हूँ

सतयुग का वामन ब्राह्मण हूँ

मैं परशुराम की ज्वाला हूँ

गंगा यमुना मेरे पग में

सरयू का पावन धाम हूँ मैं


मैं बाल्मीकि के छंदों में

मैं तुलसी की चौपाई हूँ

मैं कर्म ज्ञान हूँ गीता का

मैं सीतापति रघुराई हूँ

जिस जगह निरंकुश पाप बढ़े

उस धरती पर संग्राम हूँ मैं 


सब भक्त मुझे पा जाते हैं

मैं भक्तों का उद्धारक हूँ

बस अहंकार भोजन मेरा

मैं रावण का संहारक हूँ

मैं आदि, अनंत, अजन्मा हूँ

निर्गुण भी सगुण निष्काम हूँ मैं


संतों ऋषियों की रक्षा में
मैं बल्कल में बनवासी हूँ

दुनिया के मंगल के खातिर
मैं राजा से सन्यासी हूँ

मैं ही त्रिदेव सैकड़ों सूर्य
अनगिन देवों का नाम हूँ मैं

कवि जयकृष्ण राय तुषार 


चित्र साभार गूगल 


2 comments:

आपकी टिप्पणी हमारा मार्गदर्शन करेगी। टिप्पणी के लिए धन्यवाद |

एक पुराना होली गीत. अबकी होली में

   चित्र -गूगल से साभार  आप सभी को होली की बधाई एवं शुभकामनाएँ  एक गीत -होली  आम कुतरते हुए सुए से  मैना कहे मुंडेर की | अबकी होली में ले आन...