(कृपया बिना अनुमति के इस ब्लॉग में प्रकाशित किसी भी अंश का किसी भी तरह से उपयोग न करें)
Monday, 18 January 2021
एक ग़ज़ल-मौसम का सच छिपाती हैं शीशे की खिड़कियाँ
Sunday, 17 January 2021
एक ग़ज़ल -गमले को बोन्साई का बाज़ार चाहिए
![]() |
| चित्र -साभार गूगल |
एक ग़ज़ल -गमले को बोन्साई का बाज़ार चाहिए
गमले को बोन्साई का बाज़ार चाहिए
जब धूप लगे पेड़ सायादार चाहिए
घर भी बना तो उसको कहाँ चैन मिल सका
तख्ती पे लिक्खा था किराएदार चाहिए
विक्रम सा राजा हो तभी नवरत्न चाहिए
राजा हो जैसा वैसा ही दरबार चाहिए
कब तक दहेजमुक्त बनेगा समाज यह
बहुओं पे जुर्म बेटियों को प्यार चाहिए
मालिक भले हो झूठ -फ़रेबों के दरमियाँ
सेवक सभी को अपना वफादार चाहिए
नाटक की सफलताओं में ये बात जरूरी
जैसा हो रोल वैसा ही किरदार चाहिए
खबरों में अब मसाला ,मिलावट ,फरेब है
फिर भी सुबह की चाय पे अख़बार चाहिए
कर्तव्य भी हैं सबके इसी संविधान में
लेकिन सभी को अपना बस अधिकार चाहिए
कवि /शायर -जयकृष्ण राय तुषार
![]() |
| चित्र -साभार गूगल |
Saturday, 16 January 2021
एक ताज़ा ग़ज़ल -मगर मतला तुम्हारे हुस्न के दीदार से निकला
![]() |
| चित्र -साभार गूगल |
एक ताज़ा ग़ज़ल -
मगर मतला तुम्हारे हुस्न के दीदार से निकला
Friday, 15 January 2021
एक ताज़ा ग़ज़ल -चाँदनी का रंग भी सादा न था
![]() |
| चित्र -साभार गूगल |
Thursday, 14 January 2021
एक ताज़ा ग़ज़ल- नया शेर सुनाता हूँ कहाँ
![]() |
| चित्र -साभार गूगल |
Monday, 11 January 2021
एक ताज़ा ग़ज़ल-डूबने वालों ने छोड़ा नहीं पानी कोई
एक ताज़ा ग़ज़ल-डूबने वालों ने छोड़ा नहीं पानी कोई
अब न दरिया में भँवर है न रवानी कोई
डूबने वालों ने छोड़ा कहाँ पानी कोई
कुछ कहा तुमने कुछ हमने भी चलो भूल गए
कल की बातों का कहाँ रह गया मानी कोई
कैमरा देखके हँसने का हुनर भूल गए
ढूँढते हैं चलो तस्वीर पुरानी कोई
एक मूरत से लगा दिल तो महल छोड़ दिया
इश्क़ में अब कहाँ मीरा सी दीवानी कोई
वीडियो गेम लिए सो गए बच्चे सारे
अब न राजा है न परियों की कहानी कोई
जयकृष्ण राय तुषार
Saturday, 2 January 2021
एक ताज़ा ग़ज़ल -कितनी हसीन है ये मियाँ लखनऊ की शाम
![]() |
| 30 दिसंबर हिन्दी संस्थान मे स्थापना दिवस पर काव्य संध्या |
![]() |
| सुप्रसिद्ध ग़ज़ल गायिका बेगम अख़्तर चित्र साभार गूगल |
एक ताज़ा ग़ज़ल -
कितनी हसीन है ये मियाँ लखनऊ की शाम
तहजीब और अदब के हैं किस्से जहाँ तमाम
कितनी हसीन है ये मियाँ लखनऊ की शाम
इसके सियासी रंग के चर्चे हैं दूर तक
इसमें अटल के गीत मोहब्बत के हैं पैगाम
इसकी कशीदाकारी में है लखनवी मिजाज़
टुंडे कबाब, भूल भुलैया ,चिकन का काम
कैसे करें तरीफ़ यहाँ के मेयार की
गोकुल के कृष्ण पहले यहीं थे अवध के राम
उड़ती ,कटी पतंगे ,छतों पर ,यहाँ के हैं
भूलें मलीहाबाद क्यों खाएं हैं जिसके आम
नौशाद की मौसीक़ी ,और बेगम की गायिकी
इनके बिना कहाँ है मुकम्मल यहाँ की शाम
पूजा ,नमाज़ ,प्रार्थना ,सूफ़ी ,सबद के रंग
सबका यहाँ पे होता जमाने से एहतराम
कवि /शायर -जयकृष्ण राय तुषार
![]() |
| भूल भुलैया लखनऊ |
Wednesday, 25 November 2020
एक गीत-नए वर्ष की नई सुबह अब साँसो पर पहरे मत लाना |
एक गीत-नए वर्ष की नई सुबह
अब साँसों पर पहरे मत लाना
नए वर्ष की
नई सुबह
अब साँसो पर पहरे मत लाना |
चुभन सुई की
सह लेंगे पर
दर्द बहुत गहरे मत लाना ।
सारे रंग -गंध
फूलों के
बच्चों को बाँटना तितलियों ।
फिर वसंत के
गीत सुनाना
वंशी लेकर सूनी गलियों,
बीता साल
भुला देंगे हम
अब मौसम बहरे मत लाना ।
तारीख़ें शुभ
मंगल दिन हो
झीलों में अमृत सा जल हो,
जीवन की गति
हिरनी जैसी
वातायन की धुन्ध विरल हो,
प्रकृति तोड़ दे
घुँघरू अपने
ऐसे अब खतरे मत लाना ।
कण-कण में हो
रंग-रंगोली
दरपन में श्रृंगार भरा हो,
कविताओं के दिन
फिर लौटें
स्वर कोई भी नहीं डरा हो ,
मीठे फल ताजा
पेड़ों से लाना
पर कुतरे मत लाना ।
कवि -जयकृष्ण राय तुषार
कवि-चित्र -साभार गूगल
Saturday, 19 September 2020
एक आस्था का गीत - जहाँ सबसे सुन्दर रंग श्याम
Friday, 18 September 2020
एक भक्ति गीत -समस्त देवियों शक्तिपीठों को समर्पित
एक भक्ति गीत -देवी गीत
एक गीत -मोगरे का फूल जूड़े में
चित्र साभार गूगल एक गीत -मोगरे का फूल जूड़े में मोगरे का फूल जूड़े में सजाती है. नदी हँसकर ज़िन्दगी का गीत गाती है. धूप -छाँही सफऱ मे...
-
चित्र -साभार गूगल एक ग़ज़ल-चाँदनी का रंग भी सादा न था प्यार करने का कोई वादा न था पर तेरी नफ़रत का अंदाजा न था बाद की जंगों में रावण बच गए...
-
चित्र -गूगल से साभार प्यार के हम गीत रचते हैं इन्हीं कठिनाइयों में खिल रहा है फूल कोई धान की परछाइयों में | सो रहे खरगोश से दिन पर्...
-
चित्र साभार गूगल एक गीत-चाँदनी निहारेंगे रंग चढ़े मेहँदी के मोम सी उँगलियाँ । धानों की मेड़ों पर मेघ औ बिजलियाँ । खुले हुए जूड़े और बच्चों के...



















