Thursday, 16 September 2021

एक गीत-हिंदी रानी माँ सी

 


एक गीत-हिंदी रानी माँ सी


पखवाड़ा भर

पूजनीय है

बाकी दिन है दासी ।

सिंहासन अब

उसे सौंप दो

हिंदी रानी माँ सी ।


किसी राष्ट्र का

गौरव उसकी

आज़ादी है भाषा ,

संविधान के

षणयंत्रों से

हिंदी बनी तमाशा,

पढ़ती रही

ग़ुलामों वाली

भाषा दिल्ली,काशी ।


कैसा है

वह राष्ट्र न 

जिसकी अपनी बोली-बानी,

टेम्स नदी में

ढूंढ रहे हम

गंगाजल सा पानी,

गढ़ो राष्ट्र की

मूरत सुंदर

सीखो संग तराशी ।


बाल्मीकि,

तुलसी,कबीर हैं

निर्मल जल की धारा,

भारत अनगिन

बोली,बानी का

है उपवन प्यारा,

अपनी संस्कृति

और सभ्यता

कभी न होगी बासी ।

जयकृष्ण राय तुषार



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