एक देशगान-उस भारत का अभिनन्दन है
जिसका पानी
गंगाजल है
हर पेड़ जहाँ का चन्दन है।
जिसकी झीलों में
कमल पुष्प
उस भारत का अभिनन्दन है।
जिसकी सुबहें
सोने जैसी
दिन रजत ,ताम्र संध्याएँ हैं,
जिसके हिमगिरि
नभ,चाँद सुभग
वेदों संग परीकथाएँ हैं,
जिसके सागर में
रत्न सभी
जिसका हर उपवन नन्दन है।
जहाँ राम कृष्ण
शिव शंकर हैं
ऋषियों मुनियों के पुण्य धाम,
जहाँ सत्य अहिंसा
परम धर्म
जहाँ गौ को माँ का दिए नाम,
जिसमें अनगिन
ऋतुएँ, मौसम
सूरज का मणिमय स्यंदन है।
जहाँ एकलव्य
उद्दालक हैं
शिबि,कर्ण, सरीखे दानवीर,
जहाँ व्यास पाणिनि
शंकर हैं
जहाँ बाल्मीकि,तुलसी,कबीर,
जहाँ सीता,गीता
सावित्री और
अनुसूया का वन्दन है।
कवि -जयकृष्ण राय तुषार
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