Monday, 4 December 2023

एक आस्था का गीत -जहाँ सबसे सुन्दर रंग स्याम


 



एक आस्था का गीत -
जहाँ सबसे सुन्दर रंग श्याम  

जहाँ वंशी गूँजे हर शाम |
किशोरी जी का जो छवि धाम 
जहाँ पर कृष्ण रूप में राम !
वही है वृन्दावन का धाम |

जहाँ भगवान भक्त के दास 
सूर ,वल्लभ ,स्वामी हरिदास ,
जहाँ राजा से रंक का मेल 
सुदामा कृष्ण का सुंदर खेल ,
जहाँ यमुना का क्रीड़ाधाम 
वही है वृन्दावन का धाम |

जहाँ बस प्रेम है द्वेष न राग 
जहाँ हर मौसम होली ,फाग ,
जहाँ फूलों में इत्र सुवास 
जहाँ उद्धव जी का परिहास ,
जहाँ संतो का सुख हरिनाम 
वही है वृन्दावन का धाम |

जहाँ गीता का अमृत पान 
गोपियों का नर्तन -मधु गान ,
जहाँ मिट जाते दुःख -संताप 
पुण्य का उदय ,अस्त हो पाप ,
है जिसके वश में माया ,काम 
वही है वृंदावन का धाम |

जहाँ गिरि गोवर्धन का मान 
इन्द्र का टूटा था अभिमान ,
जहाँ गायों का पालनहार 
जहाँ भक्तों के मोक्ष का द्वार 
जहाँ सबसे सुन्दर रंग श्याम
वही है वृन्दावन का धाम |


कवि -जयकृष्ण राय तुषार 


सभी चित्र -साभार गूगल 

Friday, 24 November 2023

एक गीत -आओ फिर पाँच जोड़ बॉसुरी बजायें

चित्र साभार गूगल 


एक गीत -आओ फिर "पाँच जोड़ बॉसुरी" बजायें


आओ फिर

"पाँच जोड़

बॉसुरी" बजायें.

ठूँठ पेड़

बंज़र के

गीत गुनगुनायें.


चाँद को

बहुत देखा

भूख प्यास लिखना,

प्यास भरी

बस्ती में

गंगा सा दिखना,

धूप से

मुख़ातिब हों

तरु की छायायें.


सूखती नदी

के तट

फूलों का खिलना,

पगडण्डी

ओस भरे

खेतों से मिलना,

हिरनों की

टोली संग

चरती हों गायें.


घिसे -पिटे

बिम्बोँ

उपमानों से निकलें,

गीतों का

तंत्र मंत औ

तिलस्म बदलें,

गौरैया

बनकर फिर

धूल में नहायें.

कवि -जयकृष्ण राय तुषार

चित्र साभार गूगल 


Friday, 17 November 2023

एक गीत -छठ पर्व *डूबते दिनमान ठहरो

चित्र साभार गूगल 


छठ पर्व की सभी को शुभकामनायें. छठ मैया और भगवान सूर्यदेव सकल सृष्टि और मानव हृदय को सदैव अलौकित करते रहें. सबको उत्तम स्वास्थ्य और सुख समृद्धि प्रदान करें.


एक गीत -हम नदी की धार में शुभकामना के गीत गाये


डूबते

दिनमान ठहरो,

थाल पूजा की सजाये.

हम नदी की

धार में

शुभ कामना के गीत गाये.


छठी माँ

आशीष देना

हर व्रती के द्वार मंगल,

हम चढ़ाएंगे

तुम्हें पकवान

सुन्दर पुष्प, शतदल,

मन तुम्हारी

आस्था में

तन नदी के जल नहाये.


सृष्टि का

सौंदर्य सारा

भोर के रवि से प्रकाशित,

धरा, पर्वत

घाटियाँ सब

शुभ्र फूलों से सुवासित,

मार्ग में

भटके तपस्वी

ज्ञानियों का तम मिटाये.


कवि -जयकृष्ण राय तुषार


चित्र साभार गूगल 

Thursday, 9 November 2023

एक गीत दीपावली पर


सभी को दीपावली प्रसन्नता, रिद्धि सिद्धि ऐश्वर्य, सुख सौभाग्य प्रदान करे. रोगी को स्वस्थ करे. उदासी को मोहक मुस्कान प्रदान करे. संत को भगवान प्रदान करे. राष्ट्र को अपराजेय बनाये और शक्ति प्रदान करे. वन्देमातरम.

चित्र साभार गूगल 


एक गीत 

नदी -घाट सीढ़ियाँ सजाये


अंजुरी में

दीप जगमगाये

सुधियों में भीमसेन गाये.


भाभी का

गोरा मुख चन्द्रमा

माँ जैसे फूलों की थाली,

वेदमंत्र बाँचते पिता

आरती सजाये घरवाली,

रामज्योति

सरयू को भाये.


मौसम के

तेवर भी बदले

धान हरे झूमते अगहनी,

गेंदा, गुड़हल

गुलाब महके

इत्र गंध वाली हर टहनी,

यमुना तट

बांसुरी बजाये.


एक अमॉ

ऐसी भी प्यारे

हार गयी पूनम की रातें,

द्वार द्वार अल्पना

रंगोली

मधुर मधुर हँसी और बातें,

नदी -घाट

सीढ़ियाँ सजाये.


पर्वत की

जगमग सी घाटी

देवदार देर तक निहारे,

गढ़वाली

शिमला, कश्मीरी

मीनाक्षी काजल को पारे,

मन काशी

तन प्रयाग जाये.

चित्र साभार गूगल 


कवि -जयकृष्ण राय तुषार

Wednesday, 1 November 2023

समकालीन हिन्दी नवगीत संचयन -प्रकाशक साहित्य अकादमी


प्रकाशक साहित्य अकादमी 

प्रकाशक साहित्य अकादमी 

समकालीन नवगीत संचयन

प्रकाशक साहित्य अकादमी

सम्पादक -डॉ ओम प्रकाश सिंह

प्रत्येक का मूल्य रूपये 500

हिन्दी नवगीत का यह एक महत्वपूर्ण प्रकाशन है जिसे प्रकाशित किया है साहित्य अकादमी नई दिल्ली ने. इस संकलन में कुल 101 गीत कवियों की छह छह रचनाएँ ली गयी हैँ भाग 1 में 50 कवि एवं भाग 2 में 51 कवि हैं.क्रम अल्फाबेटीकल है. हिन्दी के पाठकों,शिक्षकों, शोधार्थियों के लिए यह बहुत उपयोगी है.

साहित्य अकादमी के अध्यक्ष श्री माधव कौशिक, निदेशक. एवं श्री अजय कुमार शर्मा जी एवं साहित्य अकादमी परिवार ने सराहनीय कार्य किया है. सभी का आभार. मेरे गीत भाग 1 में संकलित हैँ.

Monday, 30 October 2023

एक गीत -मौसम में जितने भी रंग

चित्र साभार गूगल 

चित्र साभार गूगल 


एक गीत -मौसम में जितने भी रंग उन्हें रहने दो


फूलों को

खिलने दो

नदियों को बहने दो.

मौसम में

जितने भी रंग

उन्हें रहने दो.


झील -ताल

पर्वत, 

ये घाटी, ये देवदार,

केसर, चन्दन

औषधि

नदियों की धवल धार,

तुतलाते

बच्चों सा

इनको कुछ कहने दो.


जनपद के

लोकरंग

मादल, ढपली, मृदंग,

हरे भरे

वन मैना

हिरणों की हो उमंग,

राही को

अनुभव की

धूप -छाँह सहने दो.


दिशा देह -

गंध भरे

खुशबू ले पवन बहे,

दीप जले

रंग उड़े

शिखर कलश ऊँ कहे,

स्मृति में

परी लोक

किस्सों को रहने दो.


कवि -जयकृष्ण राय तुषार

चित्र साभार गूगल 

एक गीत -करवा चौथ

चित्र साभार गूगल 

सभी को अग्रिम हार्दिक शुभकामनायें 

एक गीत -करवा चौथ

दैनिक जनसंदेश में आज 1 नवंबर 2023 को प्रकाशित 


एक चौथ का

चाँद गगन में

अनगिन नदी किनारे.

कहाँ स्वर्ग में

ऐसी

पूरनमासी होती प्यारे.


कठिन निर्जला

व्रत सरिता के

तीर सुहागिन प्यासी,

हर की पैड़ी

उज्जयिनी, पटना

प्रयाग या काशी,

घूँघट का

पट खोल प्रियतमा

चलनी चाँद निहारे.


सत्यम, शिवम

सुन्दरम शिव हैँ

कालकूट पी जाते,

माँ अन्नपूर्णा

गौरी के संग

सबका भाग्य जगाते,

स्वर्ण महल

भक्तों को देकर

अपना वदन उघारे.


सँवरा सँवरा

सात्विक मौसम

मद्धिम सुर संतूरी

रजत पात्र में

दीप जलाए

गंगा तट सिंदूरी

उतर गए हैँ

झील, सरोवर

सागर नखत, सितारे.


सत्य सनातन

धर्म जहाँ

नारी है वेद स्वरूपा,

अनुसूया के

संग सावित्री

सीता माँ, शतरूपा,

महातपस

शंकराचार्य भी

शक्ति पुंज से हारे.

चित्र साभार गूगल 


कवि जयकृष्ण राय तुषार

Monday, 23 October 2023

एक गीत -अच्छे मौसम अच्छे साथी कभी -कभी ही खिलते हैं

चित्र साभार गूगल 


एक गीत -

अच्छा मौसम, अच्छे साथी कभी -कभी ही मिलते हैं


अच्छे मौसम

अच्छे साथी

कभी -कभी ही मिलते हैं.

खुशबू वाले

फूल प्रेम की 

टहनी पर ही खिलते हैं.


सफऱ सार्थक

तब होता जब

मरुथल में सौंदर्य दिखे,

अपनी प्यास

भूलकर कोई

चट्टानों की प्यास लिखे,

बाड़मेर हो

या वृंदावन

सबके मार्ग निकलते हैं.


वन हो या 

बंजर, पठार हो

बंज़ारे तो गाते हैं,

आसमान को

छूकर पंछी

धरती पर ही आते हैं,

शिमला, केरल

गोवा सबके

सूर्य साँझ को ढलते हैं.


हर की पैड़ी

काशी, संगम

कितने जीवन जीती है,

यात्रा पथ में

अमृत देकर

गंगा माँ विष पीती है,

कुछ दीपक

आरती थाल में

कुछ लहरों पर जलते हैं.

कवि -जयकृष्ण राय तुषार

चित्र साभार गूगल 


Sunday, 22 October 2023

एक गीत -मौसम के रंग सभी हो गए मलिन

चित्र साभार गूगल 


एक गीत 

मौसम के रंग सभी हो गए मलिन


भूल गए
वन, पठार, पगडण्डी, रस्ते.
याद नहीं
राम राम, पैलगी, नमस्ते.

पाँव में
महावर के
रंग सभी छूटे,
उपवन में
तितली के
पँख नहीं टूटे,
बच्चों की टोली को
देखा क्या हँसते ?

निर्मल सी
नदियों में
शहरों के नाले,
यज्ञ, हवन
मंत्र बिना
मौन हैं शिवाले,
गाँवों की सुधियों 
में महानगर बसते.

झील -ताल
हंसों के
अब कहाँ सुदिन,
मौसम के
रंग सभी
हो गए मलिन,
मेघों के आसमान 
जल  बिना तरसते.

आओ फिर
दरपन में
देख देख माँग भरें,
इठलाती
लहरों पर
धुले हुए पाँव धरें,
मेंजों पर इत्र लगे
रख दें गुलदस्ते.

गीतकवि -जयकृष्ण राय तुषार
चित्र साभार गूगल 



Wednesday, 11 October 2023

एक गीत -सबका स्वागत करती है बस्ती बंजारों की

चित्र साभार गूगल 


एक ताज़ा गीत -

सबका स्वागत करती है बस्ती बंज़ारों की


फूल महकते

पर्वत -घाटी

चाँद -सितारों की.

सबका

स्वागत करती है 

बस्ती बंज़ारों की.


धूप -छाँह के

किस्से सुनती 

और सुनाती है,

जीवन के

रंगों से यह

खुलकर बतियाती है,

यह बस्ती है

वंशी- मादल के

फ़नकारों की.



कौतुक-कला 

लिए चलती

यह मुश्किल राहों में,

सुख दुःख

साध के रखती

अपनी लम्बी बाहों में,

यह साक्षी है

बाल्मीकि के

नव उदगारों की.


बंज़ारों के 

साथ -साथ 

हर मौसम गाता है,

सामवेद के

पंचम सुर का

यह उदगाता है,

जलधारों में

बहती 

चिंता नहीं किनारों की.


जादू -टोना

जैसे इनके 

पथ -चौरस्ते हैं,

सबका बोझ

उठाकर चलते

कितने सस्ते हैं,

दिल के

फ्रेमों में रखती

तस्वीरें यारों की.

कवि /गीतकार

जयकृष्ण राय तुषार

चित्र साभार गूगल 


एक देशगान -स्मित माछर जैसे बेटों पर है गर्व तिरंगा को

  सीता राम  कैप्टन स्मित माछर  राष्ट्र को समर्पित गीत  एक देशगान -सरयू तट पर राम लिखो  सुबह -सुबह  जब सूरज निकले  सरयू तट पर राम लिखो. जब भी...