Thursday, 9 November 2023

एक गीत दीपावली पर


सभी को दीपावली प्रसन्नता, रिद्धि सिद्धि ऐश्वर्य, सुख सौभाग्य प्रदान करे. रोगी को स्वस्थ करे. उदासी को मोहक मुस्कान प्रदान करे. संत को भगवान प्रदान करे. राष्ट्र को अपराजेय बनाये और शक्ति प्रदान करे. वन्देमातरम.

चित्र साभार गूगल 


एक गीत 

नदी -घाट सीढ़ियाँ सजाये


अंजुरी में

दीप जगमगाये

सुधियों में भीमसेन गाये.


भाभी का

गोरा मुख चन्द्रमा

माँ जैसे फूलों की थाली,

वेदमंत्र बाँचते पिता

आरती सजाये घरवाली,

रामज्योति

सरयू को भाये.


मौसम के

तेवर भी बदले

धान हरे झूमते अगहनी,

गेंदा, गुड़हल

गुलाब महके

इत्र गंध वाली हर टहनी,

यमुना तट

बांसुरी बजाये.


एक अमॉ

ऐसी भी प्यारे

हार गयी पूनम की रातें,

द्वार द्वार अल्पना

रंगोली

मधुर मधुर हँसी और बातें,

नदी -घाट

सीढ़ियाँ सजाये.


पर्वत की

जगमग सी घाटी

देवदार देर तक निहारे,

गढ़वाली

शिमला, कश्मीरी

मीनाक्षी काजल को पारे,

मन काशी

तन प्रयाग जाये.

चित्र साभार गूगल 


कवि -जयकृष्ण राय तुषार

Wednesday, 1 November 2023

समकालीन हिन्दी नवगीत संचयन -प्रकाशक साहित्य अकादमी


प्रकाशक साहित्य अकादमी 

प्रकाशक साहित्य अकादमी 

समकालीन नवगीत संचयन

प्रकाशक साहित्य अकादमी

सम्पादक -डॉ ओम प्रकाश सिंह

प्रत्येक का मूल्य रूपये 500

हिन्दी नवगीत का यह एक महत्वपूर्ण प्रकाशन है जिसे प्रकाशित किया है साहित्य अकादमी नई दिल्ली ने. इस संकलन में कुल 101 गीत कवियों की छह छह रचनाएँ ली गयी हैँ भाग 1 में 50 कवि एवं भाग 2 में 51 कवि हैं.क्रम अल्फाबेटीकल है. हिन्दी के पाठकों,शिक्षकों, शोधार्थियों के लिए यह बहुत उपयोगी है.

साहित्य अकादमी के अध्यक्ष श्री माधव कौशिक, निदेशक. एवं श्री अजय कुमार शर्मा जी एवं साहित्य अकादमी परिवार ने सराहनीय कार्य किया है. सभी का आभार. मेरे गीत भाग 1 में संकलित हैँ.

Monday, 30 October 2023

एक गीत -मौसम में जितने भी रंग

चित्र साभार गूगल 

चित्र साभार गूगल 


एक गीत -मौसम में जितने भी रंग उन्हें रहने दो


फूलों को

खिलने दो

नदियों को बहने दो.

मौसम में

जितने भी रंग

उन्हें रहने दो.


झील -ताल

पर्वत, 

ये घाटी, ये देवदार,

केसर, चन्दन

औषधि

नदियों की धवल धार,

तुतलाते

बच्चों सा

इनको कुछ कहने दो.


जनपद के

लोकरंग

मादल, ढपली, मृदंग,

हरे भरे

वन मैना

हिरणों की हो उमंग,

राही को

अनुभव की

धूप -छाँह सहने दो.


दिशा देह -

गंध भरे

खुशबू ले पवन बहे,

दीप जले

रंग उड़े

शिखर कलश ऊँ कहे,

स्मृति में

परी लोक

किस्सों को रहने दो.


कवि -जयकृष्ण राय तुषार

चित्र साभार गूगल 

एक गीत -करवा चौथ

चित्र साभार गूगल 

सभी को अग्रिम हार्दिक शुभकामनायें 

एक गीत -करवा चौथ

दैनिक जनसंदेश में आज 1 नवंबर 2023 को प्रकाशित 


एक चौथ का

चाँद गगन में

अनगिन नदी किनारे.

कहाँ स्वर्ग में

ऐसी

पूरनमासी होती प्यारे.


कठिन निर्जला

व्रत सरिता के

तीर सुहागिन प्यासी,

हर की पैड़ी

उज्जयिनी, पटना

प्रयाग या काशी,

घूँघट का

पट खोल प्रियतमा

चलनी चाँद निहारे.


सत्यम, शिवम

सुन्दरम शिव हैँ

कालकूट पी जाते,

माँ अन्नपूर्णा

गौरी के संग

सबका भाग्य जगाते,

स्वर्ण महल

भक्तों को देकर

अपना वदन उघारे.


सँवरा सँवरा

सात्विक मौसम

मद्धिम सुर संतूरी

रजत पात्र में

दीप जलाए

गंगा तट सिंदूरी

उतर गए हैँ

झील, सरोवर

सागर नखत, सितारे.


सत्य सनातन

धर्म जहाँ

नारी है वेद स्वरूपा,

अनुसूया के

संग सावित्री

सीता माँ, शतरूपा,

महातपस

शंकराचार्य भी

शक्ति पुंज से हारे.

चित्र साभार गूगल 


कवि जयकृष्ण राय तुषार

Monday, 23 October 2023

एक गीत -अच्छे मौसम अच्छे साथी कभी -कभी ही खिलते हैं

चित्र साभार गूगल 


एक गीत -

अच्छा मौसम, अच्छे साथी कभी -कभी ही मिलते हैं


अच्छे मौसम

अच्छे साथी

कभी -कभी ही मिलते हैं.

खुशबू वाले

फूल प्रेम की 

टहनी पर ही खिलते हैं.


सफऱ सार्थक

तब होता जब

मरुथल में सौंदर्य दिखे,

अपनी प्यास

भूलकर कोई

चट्टानों की प्यास लिखे,

बाड़मेर हो

या वृंदावन

सबके मार्ग निकलते हैं.


वन हो या 

बंजर, पठार हो

बंज़ारे तो गाते हैं,

आसमान को

छूकर पंछी

धरती पर ही आते हैं,

शिमला, केरल

गोवा सबके

सूर्य साँझ को ढलते हैं.


हर की पैड़ी

काशी, संगम

कितने जीवन जीती है,

यात्रा पथ में

अमृत देकर

गंगा माँ विष पीती है,

कुछ दीपक

आरती थाल में

कुछ लहरों पर जलते हैं.

कवि -जयकृष्ण राय तुषार

चित्र साभार गूगल 


Sunday, 22 October 2023

एक गीत -मौसम के रंग सभी हो गए मलिन

चित्र साभार गूगल 


एक गीत 

मौसम के रंग सभी हो गए मलिन


भूल गए
वन, पठार, पगडण्डी, रस्ते.
याद नहीं
राम राम, पैलगी, नमस्ते.

पाँव में
महावर के
रंग सभी छूटे,
उपवन में
तितली के
पँख नहीं टूटे,
बच्चों की टोली को
देखा क्या हँसते ?

निर्मल सी
नदियों में
शहरों के नाले,
यज्ञ, हवन
मंत्र बिना
मौन हैं शिवाले,
गाँवों की सुधियों 
में महानगर बसते.

झील -ताल
हंसों के
अब कहाँ सुदिन,
मौसम के
रंग सभी
हो गए मलिन,
मेघों के आसमान 
जल  बिना तरसते.

आओ फिर
दरपन में
देख देख माँग भरें,
इठलाती
लहरों पर
धुले हुए पाँव धरें,
मेंजों पर इत्र लगे
रख दें गुलदस्ते.

गीतकवि -जयकृष्ण राय तुषार
चित्र साभार गूगल 



Wednesday, 11 October 2023

एक गीत -सबका स्वागत करती है बस्ती बंजारों की

चित्र साभार गूगल 


एक ताज़ा गीत -

सबका स्वागत करती है बस्ती बंज़ारों की


फूल महकते

पर्वत -घाटी

चाँद -सितारों की.

सबका

स्वागत करती है 

बस्ती बंज़ारों की.


धूप -छाँह के

किस्से सुनती 

और सुनाती है,

जीवन के

रंगों से यह

खुलकर बतियाती है,

यह बस्ती है

वंशी- मादल के

फ़नकारों की.



कौतुक-कला 

लिए चलती

यह मुश्किल राहों में,

सुख दुःख

साध के रखती

अपनी लम्बी बाहों में,

यह साक्षी है

बाल्मीकि के

नव उदगारों की.


बंज़ारों के 

साथ -साथ 

हर मौसम गाता है,

सामवेद के

पंचम सुर का

यह उदगाता है,

जलधारों में

बहती 

चिंता नहीं किनारों की.


जादू -टोना

जैसे इनके 

पथ -चौरस्ते हैं,

सबका बोझ

उठाकर चलते

कितने सस्ते हैं,

दिल के

फ्रेमों में रखती

तस्वीरें यारों की.

कवि /गीतकार

जयकृष्ण राय तुषार

चित्र साभार गूगल 


Friday, 22 September 2023

एक ग़ज़ल -सियासत भी इलाहाबाद में संगम नहाती है



चित्र -साभार गूगल 



एक ग़ज़ल-

हमारी आस्था चिड़ियों को भी दाना खिलाती है


गले में क्रॉस पहने है मगर चन्दन लगाती है

सियासत भी इलाहाबाद में संगम नहाती है


ये नाटक था यहाँ तक आ गए कैसे ये मायावी

सुपर्णखा बनके जोगन राम को जैसे रिझाती है


कोई बजरे पे कोई रेत में धँसकर नहाता है

ये गंगा माँ निमन्त्रण के बिना सबको बुलाती है


सनातन संस्कृति कितनी निराली और पुरानी है

हमारी आस्था चिड़ियों को भी दाना खिलाती है


खिलौने आ गए बाजार से लेकिन हुनर का क्या

मेरी बेटी कहाँ अब शौक से गुड़िया बनाती है


वो राजा क्या बनेगा अश्व की टापों से डरता है

उसे दासी महल में शेर का किस्सा सुनाती है


ये हाथों की सफ़ाई है इसे जादू भी कहते हैं

नज़र से देखने वालों को यह अन्धा बनाती है


खिले हैं फूल जब तक तितलियों से बात मत करना

जरूरत पेड़ से गिरते हुए पत्ते उठाती है


कवि/शायर जयकृष्ण राय तुषार

चित्र साभार गूगल


कवि /शायर जयकृष्ण राय तुषार

Thursday, 21 September 2023

एक मुलाक़ात -डॉ अजय कुमार मिश्र महाधिवक्ता उत्तर प्रदेश सरकार


डॉ अजय कुमार मिश्र

माननीय महाधिवक्ता उत्तर प्रदेश, सरकार 

महाधिवक्ता उत्तर प्रदेश डॉ. अजय कुमार मिश्र
को स्वामी योगानंद जी की पुस्तक भेंट करते हुए 


उत्तर प्रदेश के महाधिवक्ता डॉ. अजय कुमार मिश्र जी, महाधिवक्ता बनने के पूर्व उच्चतम न्यायालय के सीनियर एडवोकेट रहे. वकालत के अतिरिक्त माननीय की रूचि भारतीय दर्शन, अध्यात्म, और भारतीय संस्कृति और परम्परा में है. साहित्य के प्रति अभिरूचि भी आपकी एक विशेषता है.इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति माननीय श्री अश्वनी कुमार मिश्र जी आपके अनुज हैं.17 नवंबर 1958 को प्रयाग में जन्म हुआ. पिता प्रतिष्ठित न्यायमूर्ति एस. आर. मिश्र.आज मुझे माननीय महाधिवक्ता उत्तर प्रदेश से मिलने और उनको पुस्तक भेंट करने का सुअवसर मिला.

महाधिवक्ता उत्तर प्रदेश डॉ.अजय कुमार मिश्र
को पुस्तक भेंट करते हुए 


डॉ. अजय कुमार मिश्र
महाधिवक्ता उत्तर प्रदेश 



Tuesday, 19 September 2023

गणेश उत्सव और महान क्रन्तिकारी तिलक

प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश 

लोकमान्य तिलक और गणेश उत्सव 

मुंबई के चौपाटी पर समुद्र की लहरों को देखता एक राष्ट्रवादी, क्रन्तिकारी विचारों में खोया था की राष्ट्र को जाति पांति के बंधन से मुक्त कैसे किया जाय और राष्ट्रीय आंदोलन में प्रबल जनमत कैसे तैयार किया जाय. तभी ट्रेन में मिले एक सन्यासी( बॉम्बे से पुणे जाते हुए )का वाक्य याद आया. भारतीय जनता की रीढ़ धर्म है. फिर उस क्रन्तिकारी ने पुणे में प्रथम बार 1893 में गणेश उत्सव का सार्वजनिक आयोजन किया. यह सभी लोगों के लिए था बिना किसी भेदभाव के. यह पूजा पहले भी शिवाजी महाराज जैसे कई राजा व्यक्तिगत तौर पर करते थे लेकिन राष्ट्रव्यापी बनाया महान वकील समाज सुधारक क्रन्तिकारी तिलक ने.तिलक 1857 के स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन की विफलता के कारणों से अत्यधिक चिंतित थे. क्योंकि उस आंदोलन में जनता का सहयोग सीमित था.बालगंगाधर तिलक के सदप्रयास से आज गणेश उत्सव न केवल महाराष्ट्र बल्कि राष्ट्र का उत्सव बन गया है. इस महान देश भक्त को कोटि कोटि नमन.यह बड़ा काम था. आप सभी को गणेश उत्सव की हार्दिक शुभकामनायें.

 

महान विचारक क्रन्तिकारी तिलक 

दो रचनाएँ करवा चौथ

  चित्र -गूगल से साभार  ये रचनाएँ दुबारा पोस्ट कर रहा हूँ सन २०१० में इन्हें पोस्ट कर चुका हूँ  एक आज करवा चौथ का दिन है आज करवा चौथ का दिन ...