Friday, 5 August 2016

एक देशगान -यह भारत बहुत महान है







चित्र -गूगल से साभार 

सभी देशवाशियों और सीमा पर तैनात हमारे देश के वीर जवानों के लिए 
स्वतन्त्रता दिवस की शुभकामनाओं के साथ 
एक देशगान -यह भारत बहुत महान है 

लाल किले पर लगा तिरंगा 
भारत का अभिमान है |
युगों -युगों से मानवता का 
रक्षक हिन्दुस्तान है |

केसर ,चन्दन की खुशबू 
जिसकी मिटटी महकाती है ,
यह सोने की चिड़िया 
केवल गीत प्रेम का गाती है ,
लेकिन संकट आये तो 
यह दुनिया का सुल्तान है |

सरहद पर हर मुश्किल में 
जो सीना ताने गाते हैं ,
हम उन वीर जवानों के 
सम्मुख यह शीश झुकाते हैं ,
मातृभूमि के लिए जिए जो 
समझो वह भगवान है |

यहाँ का बच्चा वीर भगत 
बेटी झाँसी की रानी है ,
है यहाँ अतिथि के लिए स्वर्ग 
दुश्मन को काला पानी है ,
दुनिया भर में सम्मानित 
यह भारत बहुत महान है |

युद्ध लड़ें हम तो दुश्मन की 
परछाईं  डर जाती है,
म्रत्यु हमारे पास पहुँचने 
से पहले मर जाती है ,
सब धर्मों का मेल यहाँ पर 
यही हमारी जान है |
चित्र -गूगल से साभार 

Tuesday, 26 July 2016

लोकप्रिय गीत कवि माहेश्वर तिवारी के जन्मदिन पर सम्मानित हुए कवि

सबसे बाएं श्री माहेश्वर तिवारी ,यश मालवीय ,ब्रज भूषण सिंह गौतम
 हरिपाल त्यागी फिर मैं जयकृष्ण राय तुषार पीछे भाई योगेन्द्र व्योम 


माहेश्वर तिवारी के रचना कर्म की षष्ठिपूर्ति और 
अस्सीवें जन्मदिन पर सम्मानित हुए पांच रचनाकार 

२२ जुलाई की शाम मुरादाबाद में बहुत ही यादगार रही अवसर था गीत /नवगीत के वरिष्ठ और लोकप्रिय हस्ताक्षर आदरणीय माहेश्वर तिवारी जी के जन्मदिन और उनके रचनाकर्म की षष्ठिपूर्ति मनाये जाने का | किसी कवि के रचनाकर्म की षष्ठिपूर्ति मनाये जाने का संभवतः यह प्रथम अवसर रहा होगा | इस सुखद अवसर पर उनके गीतों की संगीतमय प्रस्तुति उनकी धर्मपत्नी संगीत मर्मग्य श्रीमती बालसुन्दरी तिवारी जी ने किया |इसके बाद 'माहेश्वरतिवारी नवगीत सृजन सम्मान' से डॉ राजेन्द्र गौतम दिल्ली ,श्री हरिपाल त्यागी दिल्ली ,श्री ब्रजभूषण सिंह गौतम मुरादाबाद यश मालवीय और मुझको [जयकृष्ण रायतुषार] को शाल सम्मान पत्र वाग्देवी की प्रतिमा और पांच हजार की राशि से सम्मानित किया गया | कार्यक्रम का अद्भुत संचालन श्री योगेन्द्र व्योम और कृष्ण कुमार नाज़ ने किया |फोटो सौजन्य श्री योगेन्द्रव्योम |कार्यक्रम की अध्यक्षताश्री डी०पी० सिंह नेकिया था| कार्यक्रम में शानदार कवि गोष्ठी का भी आयोजन किया गया |जिया ज़मीर ने माहेश्वर जी पर एक नज़्म पोर्ट्रेट पर लिख कर भेंट किया | आयोजन को शानदार बनाया भाषा ,अक्षरा और भाई समीर तिवारी ने केक सजाकर चार केक पर चार पुस्तकों के नाम लिखे थे |हरसिंगार कोई तो हो ,सच की कोई शर्त नहीं ,नदी का अकेलापन और फूल आये हैं कनेरों में [चार नवगीत संग्रह तिवारी जी के हैं ]आयोजन अक्षरा साहित्यिक संस्था की ओर से किया गया था |कार्यक्रम में डॉ स्वदेश भटनागर ऋचा पाठक के साथ अन्य स्थानीय कवि मौजूद रहे | हम माहेश्वर जी के शतायु होने की कामना करते हैं |



माहेश्वर तिवारी के दो नवगीत संग्रह [दो ही मेरे पास उपलब्ध हैं ]

Thursday, 23 June 2016

एक गीत -मछली तो चारा खायेगी

चित्र -गूगल से साभार 


एक गीत -मछली तो चारा खायेगी 

कोई भी 
तालाब बदल दो 
मछली तो चारा खायेगी |
एक उबासी 
गंध हवा के 
नाम वसीयत कर जायेगी |

सत्ता का शतरंज /
बिसातों पर उजले -
काले मोहरे हैं ,
आप हमें 
अनभिज्ञ न समझें 
सबके सब परिचित चेहरे हैं ,
आप सभी 
छल -छद्म करेंगे 
जिससे की सत्ता आयेगी |

आप सदन 
कहते हैं जिसको 
वह लाक्षागृह से बदतर है ,
आज प्रजा की 
चिंता किसको 
राज सभा का दिल पत्थर है ,
राजगुरू को 
लाभ मिलेगा जिससे-
वही युक्ति भायेगी | 

Monday, 30 May 2016

नयी सदी के नवगीत -तृतीय खण्ड सम्पादक -डॉ ० ओमप्रकाश सिंह

नयी सदी के नवगीत -तृतीय खण्ड
सम्पादक -डॉ ० ओमप्रकाश सिंह 


नयी सदी के नवगीत -सम्पादक -डॉ ओमप्रकश सिंह 


जिस तरह विश्व विद्यालयों में ,पत्र -पत्रिकाओं में आलोचनाओं में एक साजिश के अंतर्गत हिंदी गीत को खारिज़ कर दिया गया लगा कि हिंदी गीत अब खत्म हो जायेगा |हालाँकि हिंदी गद्य कविता अपनी पीठ थपथपाती है लेकिन न कोई नागार्जुन बन सका न ही निराला न कविता आम जन में स्वीकार्य है |हिंदी गीत और गीत कवि भी दूध के धुले नहीं हैं उनमें भी आत्मश्लाघा मंच की भड़ैती और कुछ की अतिशय लोकप्रियता भी उन्हें लिखने पढ़ने से दूर करती गयी |लेकिन हाल में कई साझा नवगीत के संकलन आये जो गीत को बचाने या मुख्य धारा में जोड़ने के प्रयास में लगे रहे | तमाम  असहमतियों और विसंगतियों के साथ मैं उनके प्रयासों की सराहना करता हूँ |आदरणीय निर्मल शुक्ल ,भाई नचिकेता और राधेश्याम बंधू का प्रयास हाल के दिनों में सराहनीय रहा |दिनेश सिंह जीवन पर्यन्त नवगीत के लिए समर्पित रहे |हाल में एक उल्लेखनीय प्रयास आदरणीय ओमप्रकाश सिंह जी ने नयी सदी के नवगीत निकालकर किया है |मुझे तीसरा अंक प्राप्त हुआ है जिसमें कुल पन्द्रह गीत कवि शामिल किये गए हैं |इन गीत कवियों के आत्मकथ्य भी प्रकाशित हैं | अनिल कुमार ,रमेश दत्त गौतम ,उदय शंकर सिंह गौतम ,उदय ,बृजनाथ श्रीवास्तव ,राघवेन्द्र तिवारी ,शीलेन्द्र कुमार सिंह चौहान रमेश चन्द्र पन्त ,मधु प्रसाद ,ओम धीरज ,जय चक्रवर्ती ,अजय पाठक ,जगदीश व्योम ,यशोधरा राठौर विनय मिश्र और मैं जयकृष्ण राय तुषार |

निसंदेह अग्रज ओमप्रकाश सिंह का यह कार्य हिंदी गीत के लिए संजीवनी का कार्य करेगा |हिंदी प्रकृति की हर लय में हर कंकण -कण में समाहित है यह मजदूर को स्त्री को चरवाहे को शोक में संयोग में वियोग में उल्लास में हर जगह मनुष्य का साथी है |इसकी मोहक छाया में हमारी संस्कृति सभ्यता हमारे संस्कार तीज त्यौहार सभी पुष्पित -पल्लवित होते हैं |यह गीत कभी नहीं मरेगा जब तक हम रहेंगे हमारी धरती रहेगी तब तक हमारे होठों पर गीत भी रहेंगे ये गीत कोमल भी होंगे कठोर भी होंगे प्रेम के भी होंगे रोटी के भी होंगे |मगर हर हाल में रहेंगे गीत ही |ओमप्रकाश सिंह जी को शतायु होने की कामना के साथ |

कवि /सम्पादक डॉ ० ओमप्रकाश सिंह 

Thursday, 26 May 2016

नवगीत संग्रह 'रिश्ते बने रहें कवि योगेन्द्र वर्मा व्योम -एक अवलोकन माहेश्वर तिवारी की नज़र में

समकालीन गीत संग्रह -रिश्ते बने रहें
कवि -योगेन्द्र वर्मा व्योम 


पुस्तक समीक्षा -रिश्ते बने रहें [नवगीत संग्रह कवि -योगेन्द्र वर्मा व्योम ]

कोमल गांधार में पगे नवगीत -
सुप्रसिद्ध नवगीत कवि माहेश्वर तिवारी की कलम से -

अपने किसी आत्मीय की रचना धर्मिता पर लिखना एक जोखिम भरा काम है ,इसमें अतिश्लाघा होने का खतरा बराबर बना रहता है |ऐसे क्षणों में तटस्थ भाव से मुल्यांकन एक कसौटी बन जाता है |मेरे सामने कुछ ऐसी ही कसौटी आकर खड़ी हो गयी है 'रिश्ते बने रहें 'की भूमिका के संदर्भ में |यह व्योम की दूसरी काव्य कृति है समकालीन गीत संग्रह के रूप में पहली काव्य कृति 'इस कोलाहल में 'के बाद |कोलाहल से भरे समय में भी रिश्तों को बनाये रखने की आकांक्षा एक रचनात्मक प्रयास ही कहा जायेगा |समय की आपाधापी में रिश्ते छूटते -टूटते जाते हैं ,लेकिन एक सजग संवेदनशील रचनाकार अपनी रचनात्मक तुरपाई का कौशल दिखा सकता है |हिंदी नवगीत ने अपनी आधी सदी से अधिक कालावधि की यात्रा में रिश्तों की तलाश ,जड़ों की तलाश और उन्हें बनाए रखने की कोशिश ही तो की है|

इस दृष्टि से भी रिश्ते बने रहें की रचनाएँ आमजन और कविता के बीच के क्षत -विक्षत पुल की मरम्मत कर उसे आवाजाही के लिए सुगम बनाने की रचनात्मक प्रक्रिया में एक सार्थक पहल है |मुझे विश्वास है कि हिंदी जगत व्योम के पूर्व संग्रह की तरह रिश्ते बने रहें 'की रचनाओं से नए सृजनात्मक सम्बन्ध -सेतु बनाकर भविष्य की रचनाशीलता को सम्बल प्रदान करेगा |
कवि -योगेन्द्र वर्मा व्योम 


[पुस्तक की भूमिका से कुछ अंश मात्र ]

पुस्तक -रिश्ते बने रहें 

कवि -योगेन्द्र वर्मा व्योम 

प्रकाशक -गुंजन प्रकाशन मुरादाबाद 

मूल्य दो सौ रूपये 

Sunday, 15 May 2016

पुस्तक समीक्षा -संवत बदले नवगीत संग्रह -कवि गणेश गम्भीर

नवगीत संग्रह -संवत बदले
कवि -गणेश गम्भीर 
पुस्तक परिचय -संवत बदले 

मई की चिलचिलाती धूप में नीम की घनी छांह सरीखा है भाई गणेश गम्भीर का नया नवगीत संग्रह 'संवत बदले 'इसे अंजुमन प्रकाशन ने प्रकाशित किया है |नवगीतों की फिर से और अधिक मजबूती से वापसी हो रही है |कुछ समय पूर्व लग रहा था की यह समयातीत हो जायेगा लेकिन अपने कंटेंट की दमदारी की वजह से यह जन सामान्य की अपेक्षाओं पर खरा उतरा है |यह अलग बात है इस विधा को फेसबुकिया कवियों ने जरुर नुकसान पहुँचाया है |इस संग्रह में कुल 64 गीत हैं जो विभिन्न विषयों पर आधारित हैं |पुस्तक का मूल्य थोड़ा अखरने वाला है जिसे दो सौ रखा गया है |भाई गणेश गम्भीर जी को इस संग्रह हेतु बधाई |

एक गीत -नहीं लिखूंगा गीत [इसी संग्रह से ]

विज्ञापन से वाक्य सरीखे 
चपल -चटपटे ,मीठे -तीखे 
नहीं लिखूंगा गीत |

जीवन के अमृत पल का 
अन्वेषण करना है 
समय कथा का 
शब्द -शब्द विश्लेषण करना है 
आगामी युग तक 
उसका पारेषण करना है |

धारा में बहती लाशों- सा 
जो न करे प्रतिरोध न चीखे 
नहीं लिखूंगा गीत |

मन पर अनुभव के निशान हैं 
तन पर स्थितियों के 
हिंसक वार हुआ करते हैं 
जब- तब स्म्रतियों के 
किन्तु विरुद्ध खड़ा होना है 
मुझको विकृतियों के |

जो अनीति का करे समर्थन 
और क्रन्तिकारी सा दीखे 
नहीं लिखूंगा गीत |

Friday, 13 May 2016

एक कविता -प्यार अकेले हो जाने का नाम है कवि -अज्ञेय

कवि -अज्ञेय 

महान कवि -सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय 

की  एक लघु कविता-

प्यार अकेले हो जाने का एक नाम है 

प्यार अकेले हो जाने का एक नाम है
यह तो बहुत लोग जानते हैं
पर प्यार 
अकेले छोड़ना भी होता है इसे
जो
वह कभी नहीं भूली
उसे
जिसे मैं कभी नहीं भूला ......नई दिल्ली 1980
[अज्ञेय संकलित कविताएँ -चयन और भूमिका नामवर सिंह प्रकाशक नेशनल बुक ट्रस्ट से 

चित्र /पेंटिंग्स गूगल से साभार 

Thursday, 7 April 2016

एक गीत -माँ भी तो गंगा सी बहती है



चित्र /पेंटिग्स गूगल से साभार 


एक गीत -माँ भी तो गंगा सी बहती है 

रिश्तों का 
दंश 
रोज सहती है |
माँ भी 
तो गंगा -
सी बहती है |

मौसम 
से भी 
पहले बदली है,
निर्गुण है 
सोहर है 
कजली है ,
दुविधा में 
कभी 
नहीं रहती है |

भोलापन 
उसकी 
कमजोरी है ,
लोककथा 
बच्चों की 
लोरी है ,
गीता है 
माँ !
सच ही कहती है |

सब अपने 
ही
उसको छलते हैं ,
थके हुए
पांव
मगर चलते हैं ,
अपना दुःख 
कब 
किससे कहती है |


Monday, 4 April 2016

एक गीत -चांदनी थी तुम

चित्र -गूगल से साभार 



एक गीत -चांदनी थी तुम 
चांदनी थी 
तुम ! धुँआ सी 
हो गयी तस्वीर | |
मन तुम्हारा 
पढ़ न पाए 
असद ,ग़ालिब ,मीर |

घोंसला  तुमने 
बनाया 
मैं परिंदों सा उड़ा ,
वक्त की 
पगडंडियों पर 
जब जहाँ चाहा मुड़ा .
और तेरे 
पांव में 
हर पल रही जंजीर |

खनखनाते 
बर्तनों में 
लोरियों में गुम रही .
घन  अँधेरे में 
दिए की लौ 
सरीखी तुम रही ,
आंधियां 
जब भी चलीं 
तुम हो गयी प्राचीर |

पत्थरों में भी 
अनोखी 
मूर्तियाँ गढ़ती रही ,
एक दस्तावेज 
अलिखित 
रोज तुम पढ़ती रही ,
ताल के 
शैवाल में तुम 
खिली बन पुण्डीर |

Friday, 1 April 2016

एक गीत -शायद ऐसा मीत नहीं है

चित्र -गूगल से साभार 




क गीत -शायद ऐसा मीत नहीं है 

फूल -तितलियाँ 
खुशबू भी है 
लेकिन मन में गीत नहीं है |
जो हँसता -रोता हो 
संग -संग 
शायद ऐसा  मीत नहीं है |

आँखे -नींद 
यामिनी सुंदर 
लेकिन सपने टूट गए  हैं,
दूर निकल जाने 
की जिद में 
परिचित रस्ते छूट गए हैं ,
अब न हारने का 
कोई ग़म और 
जीत भी जीत नहीं है |

शहर फूस के 
और सुलगती 
सिगरेटों के आसमान हैं ,
ओहदों की 
कुण्डी लटकाए 
रिश्ते -नाते घर -मकान हैं ,
हंसी -ठहाके 
महफ़िल सब है 
लेकिन वह संगीत नहीं है |
चित्र -गूगल से साभार 

एक गीत -मोगरे का फूल जूड़े में

  चित्र साभार गूगल  एक गीत -मोगरे का फूल जूड़े में  मोगरे का फूल  जूड़े में  सजाती है.  नदी  हँसकर  ज़िन्दगी का गीत गाती है. धूप -छाँही  सफऱ मे...