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| चित्र साभार गूगल |
एक गीत -नदी के इस पार मैं हूँ
नदी के इस पार
मैं हूँ
उस तरफ सब फूल हैं.
घना कोहरा
नाव माझी
बात में मशगूल हैं.
गन्ध पुष्पों के
बिना अब
देवता पर क्या चढ़े?
शोक में
डूबा हुआ मन
मंत्र वैदिक क्या पढ़े?
तैर भी
सकता नहीं
गहरे भंवर के कूल हैं.
रेत के टीले
इधर हैं
उधर चंदन वन घना है,
आरती के
स्वर उधर हैं
इधर मौसम अनमना है,
राम पथ में
पाँव नंगे
कांच बिखरे शूल हैं.
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| चित्र साभार गूगल श्रीराम जी |


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