Sunday, 22 December 2019

एक गीत -राम- कृष्ण -गंगा की धरती भारत ! इसे प्रणाम करो




एक गीत -राम -कृष्ण -गंगा की धरती भारत !
इसे प्रणाम करो 

राम-कृष्ण 
गंगा की धरती भारत !
इसे प्रणाम करो |
जिस मिटटी में 
जन्म लिए 
यह जीवन उसके नाम करो |

हमें प्रज्ज्वलित 
करना है फिर 
बुझती हुई मशालों को ,
दन्तहीन 
करना होगा 
अब सारे विषधर व्यालों को ,
इसे द्वारिका पुरी 
बना दो 
या सरयू का धाम करो |

खतरे में है 
देश हमारा 
पढ़े -लिखे गद्दारों से ,
षड्यन्त्रों की 
बू आती है 
मजहब की दीवारों से ,
देश विरोधी 
गतिविधियों से 
इसको मत बदनाम करो |

भारत सबका 
आश्रयदाता 
सबसे साथ निभाता है ,
एक साथ सूफ़ी 
गुरुवाणी 
कीर्तन मौसम गाता है ,
संविधान का 
आदर करना 
सीखो मत संग्राम करो |

सभी चित्र -साभार गूगल 

Saturday, 7 December 2019

एक गीत -स्वर्णमृग की लालसा


चित्र -साभार गूगल 

एक गीत -स्वर्णमृग की लालसा 

स्वर्ण मृग की 
लालसा 
मत पालना हे राम !
दोष 
मढ़ना अब नहीं 
यह जानकी के नाम |

आज भी 
मारीच ,रावण 
घूमते वन -वन ,
पंचवटियों 
में लगाये 
माथ पर चन्दन ,
सभ्यता 
को नष्ट करना 
रहा इनका काम |

लक्ष्मण रेखा 
विफल 
सौमित्र मत जाना ,
शत्रु का 
तो काम है 
हर तरफ़ उलझाना ,
चूक मत करना 
सुबह हो ,
दिवस हो या शाम |

Friday, 6 December 2019

एक गीत -कैक्टस का युग



चित्र -साभार -गूगल 

एक गीत - कैक्टस का युग 

कैक्टस का
युग कहाँ 
अब बात शतदल की ?
हो गयी 
कैसे विषैली 
हवा जंगल की |

फेफड़ों में
दर्द भरकर 
डूबता सूरज ,
हो गया 
वातावरण का 
रंग कुछ असहज ,
अब नहीं 
लगती सुरीली 
थाप मादल की |

भैंस के 
आगे बजाते 
सभी अपनी बीन ,
आज के 
चाणक्य ,न्यूटन 
और आइन्स्टीन ,
कोयले की 
साख बढ़ती 
घटी काजल की |

रुग्ण सारी 
टहनियों के 
पात मुरझाये ,
इस तुषारापात में
चिड़िया 
कहाँ गाये ,
मत बनो 
चातक बुझाओ 
प्यास बादल की |

भोर का 
कलरव 
लपेटे धुन्ध सोता है ,
एक लोकल 
ट्रेन जैसा 
दिवस होता है ,
किसे 
चिन्ता है 
हमारे कुशल -मंगल की |

सभी चित्र साभार गूगल 

Thursday, 28 November 2019

एक ताजा गीत-नदी में जल नहीं है


एक गीत-नदी में जल नहीं है

धुन्ध में आकाश,
पीले वन,
नदी में जल नहीं है ।
इस सदी में
सभ्यता के साथ
क्या यह छल नहीं है ?

गीत-लोरी
कहकहे
दालान के गुम हो गये,
ये वनैले
फूल-तितली,
भ्रमर कैसे खो गये,
यन्त्रवत
होना किसी
संवेदना का हल नहीं है ।

कहाँ तुलसी
और कबिरा का
पढ़े यह मंत्र काशी,
लहरतारा
और अस्सी
मुँह दबाये पान बासी,
यहाँ
संगम है मगर
जलधार में कल-कल नहीं है ।

कला-संस्कृति
गीत-कविता
इस समय के हाशिये हैं,
आपसी
सम्वाद-निजता
लिख रहे दुभाषिये हैं,
हो गए
अनुवाद हम पर
कहीं कुछ हलचल नहीं है ।

सभी चित्र साभार गूगल


Wednesday, 23 October 2019

एक गीत-बापू ! रहे हिमालय


एक गीत -बापू ! रहे हिमालय
बापू रहे
हिमालय ,उनका
दर्शन गोमुख धारा है ।
यह जलती
मशाल जैसा है
जहाँ-जहाँ अँधियारा है ।

रंगभेद के
प्रबल विरोधी
गिरमिटिया कहलाते थे,
चरखा-खादी
लिए साथ में
रघुपति राघव गाते थे,
सत्य अहिंसा
मन्त्र उन्ही का
मानवता का नारा है ।

छुआछूत
अभिशाप बताते
रहे स्वदेशी को अपनाते,
हिन्दू-मुस्लिम
सिक्ख-ईसाई
सादर सबको गले लगाते,
आज़ादी के
अनगिन तारों में
गाँधी ध्रुवतारा है ।

लड़े गुलामी
और दासता की
अभेद्य प्राचीरों से,
एक लुकाठी
लड़ी हजारों
बन्दूकों-शमशीरों से,
चम्पारण
दांडी का नायक
विजयी था,कब हारा है?

कवि -जयकृष्ण राय तुषार 

Wednesday, 14 August 2019

एक देशगान-आज़ादी का पर्व बड़ा है


एक देशगान-आज़ादी का पर्व बड़ा है

आज़ादी का पर्व बड़ा है
मज़हब के त्योहारों से ।
आसमान को भर दो
अपनी खुशियों के गुब्बारों से ।

मातृभूमि के लिए मरा जो
वह सच्चा बलिदानी है,
जो दुश्मन से हाथ मिलाए
खून नहीं वह पानी है,
भारत माँ से माफ़ी माँगें
कह दो अब ग़द्दारों से ।

अनगिन फूलों का उपवन यह
यहाँ किसी से बैर नहीं,
जो सरहद पर आँख दिखाए
समझो उसकी खैर नहीं,
काँप गया यूनान,सिकन्दर
पोरस की तलवारों से ।

फिर बिस्मिल,आज़ाद
भगत सिंह बन करके दिखलाना है,
वन्देमातरम, वन्देमातरम
वन्देमातरम गाना है,
फहरायेंगे वहाँ तिरंगा
कह दो चाँद सितारों से ।
चित्र-साभार गूगल


एक गीत-खिला-खिला केसर का एक फूल लाना

चित्र-गूगल से साभार

एक गीत-खिला-खिला केसर का एक फूल लाना

खिला-खिला
केसर का
एक फूल लाना ।
ओ माली !
ज़न्नत को
नज़र से बचाना ।

शतदल की
गंध उठे
मीठी डल झील से,
पदमा सचदेव
लिखें
कविता तफ़सील से,
बंजारे
घाटी के
बाँसुरी बजाना ।

हाथ में
तिरंगा ले
नीलगगन उड़ना,
आतंकी
आँधी से
ले त्रिशूल लड़ना,
बर्फ़ानी बाबा
हर
आग से बचाना ।

ख़त्म हो
कुहासा अब
घाटी में धूप खिले,
मसजिद में
हो अज़ान
मन्दिर में दीप जले,
गुरद्वारे
जाकर
गुरुग्रन्थ को सजाना ।

चित्र-साभार गूगल


Sunday, 11 August 2019

एक गीत -आज़ादी का अर्थ नहीं है



विश्व नेता -माननीय मोदी जी 

कश्मीर  पर भारत सरकार द्वारा लिया गया निर्णय बहुत ही सराहनीय है, लेकिन विपक्ष के कुछ सांसद अपने ही देश के ख़िलाफ़ बयान देकर राष्ट्र की अस्मिता से खिलवाड़ ही नहीं सही मायने में राष्ट्रद्रोह कर रहे हैं । सरकार के साहसिक निर्णय के साथ पूरा देश है ।
एक गीत -आज़ादी का अर्थ नहीं है --
भारत नहीं डरा धमकी से
नहीं डरा हथियारों से ।
वक्त सही है निपटेगा अब
देश, सभी ग़द्दारों से ।

जिसे तिरंगे से नफ़रत हो
देश छोड़कर जाये ,
आज़ादी का अर्थ नहीं
दुश्मन से हाथ मिलाये,
मुक्त हुई डल झील की
कश्ती अब क़ातिल पतवारों से ।

जयचन्दों के पुरखों की
यह भारत अब जागीर नहीं,
सरहद पर ब्रह्मोस खड़ा है
लकड़ी की शमशीर नहीं,
आतंकी साम्रज्य मिटेंगे
अभिनन्दन के वारों से ।

संसद में भी कैसे-कैसे
चेहरे चुनकर आते हैं,
रावलपिंडी और करांची
की प्रशस्ति बस गाते हैं,
इनको मिलती है ख़ुराक
कुछ टी0वी0 कुछ अख़बारों से
जय हिंद जय भारत

चित्र -गूगल से साभार 

Friday, 9 August 2019

एक गीत -अब बारूदी गन्ध न महके

चित्र -गूगल से साभार 



एक गीत -अब बारूदी गन्ध न महके 

अब बारूदी 
गन्ध न महके 
खुलकर हँसे चिनार |
हवा डोगरी 
में लिख जाये 
इलू -इलू या प्यार |

जलपरियाँ 
लहरों से खेलें 
गयीं जो कोसों-मील ,
फिर कल्हण 
की राजतारंगिणी 
गाये यह  डल झील ,
नर्म उँगलियाँ 
छेड़ें हर दिन
संतूरों के तार |

कली -कली 
केसर की 
घाटी में '' नूरी '' हो जाये ,
मौसम 
सूफ़ी रंग में  रंगकर 
गली -गली फिर गाये ,
नफ़रत 
अपनी जिद को
छोड़े मांगे प्रेम उधार |

शाल बुनें
कश्मीरी सुबहें 
महकें दिन -संध्याएँ ,
लोकरंग 
में रंगकर निखरें 
सारी ललित कलाएँ ,
नये परिंदों से 
अब बदले 
घाटी का संभार |
चित्र -साभार गूगल 

Monday, 3 June 2019

एक गीत -कहीं देखा गाछ पर गातीं अबाबीलें


चित्र -साभार गूगल 


एक गीत -कहीं देखा गाछ पर गाती अबाबीलें 

ढूँढता है 
मन हरापन 
सूखतीं झीलें |
कटे छायादार 
तरु अब 
 ठूँठ ही जी लें |

धूप में 
झुलसे हुए
चेहरे प्रसूनों के ,
घर -पते 
बदले हुए हैं 
मानसूनों के ,
कहीं देखा 
गाछ पर 
गाती अबाबीलें |

खेत -वन 
आँगन 
हवा में भी उदासी है ,
कृष्ण का 
उत्तंग -
बादल भी प्रवासी है ,
प्यास 
चातक चलो 
अपने होंठ को सी लें |

मई भूले 
जून का 
चेहरा लवर सा है ,
हर तरफ़ 
दावाग्नि 
मौसम बेख़बर सा है ,
सुबह -संध्या 
दिवस चुभती 
धूप की कीलें |


चित्र -साभार गूगल 

एक गीत -मोगरे का फूल जूड़े में

  चित्र साभार गूगल  एक गीत -मोगरे का फूल जूड़े में  मोगरे का फूल  जूड़े में  सजाती है.  नदी हँसकर  ज़िन्दगी का   गाती  है. धूप -छाँही  सफऱ में ...