एक गीत -राम -कृष्ण -गंगा की धरती भारत !
इसे प्रणाम करो
राम-कृष्ण
गंगा की धरती भारत !
इसे प्रणाम करो |
जिस मिटटी में
जन्म लिए
यह जीवन उसके नाम करो |
हमें प्रज्ज्वलित
करना है फिर
बुझती हुई मशालों को ,
दन्तहीन
करना होगा
अब सारे विषधर व्यालों को ,
इसे द्वारिका पुरी
बना दो
या सरयू का धाम करो |
खतरे में है
देश हमारा
पढ़े -लिखे गद्दारों से ,
षड्यन्त्रों की
बू आती है
मजहब की दीवारों से ,
देश विरोधी
गतिविधियों से
इसको मत बदनाम करो |
भारत सबका
आश्रयदाता
सबसे साथ निभाता है ,
एक साथ सूफ़ी
गुरुवाणी
कीर्तन मौसम गाता है ,
संविधान का
आदर करना
सीखो मत संग्राम करो |
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