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| हिंदी कहानी के चार यार -चित्र साभार गूगल |
ख्यातिलब्ध उपन्यासकार ,संस्मरण लेखक ,कथाकार ,बेहतरीन सम्पादक ,यारों के यार ,हिंदी कहानी के चार यार [ज्ञानरंजन ,काशीनाथ सिंह ,दूधनाथ सिंह और स्मृतिशेष रवीन्द्र कालिया ]और भारतीय ज्ञानपीठ के निदेशक पद को सुशोभित कर चुके रवीन्द्र कालिया ने धर्मयुग ,गंगा -जमुना ,वागर्थ ,और नया ज्ञानोदय का बेहतरीन सम्पादन किया था | उनकी धर्मपत्नी ममता कालिया हिंदी की चर्चित कथाकार हैं | रवीन्द्र कालिया के परममित्र ग़ज़ल सम्राट जगजीत सिंह भी अब हमारे बीच नहीं हैं | कालिया जी के गुरु महान कथाकार ,नाटककार मोहन राकेश थे |
कालिया जी को याद करते हुए एक गीत -
कालिया जी इक मोहब्बत का फ़साना साथ लाये
छोड़कर
जगजीत का संग
जब इलाहाबाद आये |
कालिया जी
इक मोहब्बत का
फ़साना साथ लाये |
शब्द के
जल से प्रवाहित
किये गंगा और जमुना ,
आँख
जालन्धर
रसूलाबाद उनकी नींद ,सपना ,
हमसफ़र
बन गये
ममता कालिया का साथ पाये |
चार यारों
की कलम
हिंदी कहानी चूमती है ,
कुछ इलाहाबाद
काशी की
धुरी पर घूमती है ,
कालिया जी
कुछ अलग थे
अनगिनत किरदार पाये |
कई मौसम
शहर कितने
बदलकर बदले नहीं ,
कालिया जी
इस इलाहाबाद
से निकले नहीं |
ज़िन्दगी
जिन्दादिली से
जिए सारे ग़म भुलाये |
कवि -जयकृष्ण राय तुषार
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| कथाकार ममता कालिया |



















