![]() |
| प्रभु जगन्नाथ जी |
वृंदावन के मुरलीधर
हे जगन्नाथ भगवान.
महाभोग की महिमा गाते
भक्त और भगवान.
बहन सुभद्रा, बलदाऊ के
रथ की शोभा न्यारी,
स्वयं अलग रथ पर बैठे हैं
प्रभु पीतांबर धारी,
माँ लक्ष्मी प्रभु के भक्तों को
देती हैं वरदान.
इंद्रद्युम्न गुंडीचा विद्यापति
पर कृपा तुम्हारी,
नील ज्योति से नीलाँचल की
धरती जगमग सारी,
द्वार तुम्हारे पहरा देते
रामभक्त हनुमान.
फूल गूंथती बेला
कर्माबाई भोग लगाती,
प्रभु साक्षी गोपाल कथा को
हर दिन पुरी सुनाती
जब जब माधवदास बुलाते
आते हैं भगवान.
विश्वरूप पर कृपा तुम्हारी
हे प्रभु मोक्ष प्रदाता
तेरी ही लीला से
दास निमाई भजन सुनाता
तेरी महिमा गाते रहते
हर युग वेद, पुरान.
जो छवि भक्तों के मन भाये
प्रभु भी वही दिखाते
भक्त शिरोमणि तुलसी केवल
सियाराम को गाते,
बहुत अधिक मुश्किल है
प्रभु की महिमा का गुणगान.
कवि /गीतकार
जयकृष्ण राय तुषार
![]() |
| जगन्नाथ जी मंदिर पुरी |


बहुत सुंदर भक्ति-गीत
ReplyDeleteसादर प्रणाम सर. जय जगन्नाथ जी आपका मंगल करें
Delete