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| चित्र सभार गूगल |
एक गीत - अँगारों से फूल न मांगो
अँगारों से
फूल न माँगो
दरिया से बरसात नहीं ।
सफऱ
धूप में जब हो अपना
शोख चाँदनी रात नहीं ।
नंगे पाँव
कंटीले पथ में
उफ़ मत करना चलते जाना,
शोक गीत
मत लिखना प्यारे
हँसकर सबसे मिलते जाना,
बुझ बुझ कर भी
जलना दीपक
जीवन भर यह मात नहीं ।
वंशी छूटे
नहीं होंठ से
जग दीवाना हो जाएगा,
सूरज तो
कल निकलेगा ही
तम का दानव खो जाएगा
दुनिया आँसू
नहीं पोछती
पढ़ती है जज़्बात नहीं ।
नींद रहे या
रहे जागरण
कभी छोड़ना मत सपना,
मौसम कोई
राग सुनाये
तुम आशा के स्वर लिखना,
मिट्टी की
महिमा से बेहतर
चन्दन की सौगात नहीं ।
जयकृष्ण राय तुषार
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