Wednesday, 5 May 2021

एक गीत -नीलकंठ कौन बने   

 


चित्र -गूगल से साभार 


एक गीत -नीलकंठ कौन बने 
नीलकंठ 
कौन बने 
विषभरी हवाएँ  हैं |

भोर की 
किरन पीली 
संध्यायेँ  तेजहीन ,
औषधियों ,
फूलों की 
गन्ध खा गई जमीन ,
जंगल में 
नरभक्षी 
बाघ की कथाएँ हैं |

दरपन पे 
धूल जमी 
दिन का श्रृंगार गया ,
मौसम 
ज्वर बाँट रहा 
सगुन दिवस हार गया ,
कौन पढ़े 
कौन सुने 
बोझिल कविताएं हैं |

गरजो 
बरसो मेघों 
विपदाएं बह जाएँ ,
जीवन के 
राग लिए 
सुख के क्षण रह जाएँ ,
हवन कुण्ड 
धुआँ भरे 
सीली समिधाएँ हैं |

कवि-जयकृष्ण राय तुषार 



चित्र -साभार गूगल 

8 comments:

  1. बहुत सुंदर

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  2. आपकी कविता में संतप्त मानवता का आर्तनाद है तुषार जी।

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    1. हार्दिक आभार सर |भयावह स्थिति है ईश्वर सबकी रक्षा करे |

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  3. गरजो
    बरसो मेघों
    विपदाएं बह जाएँ ,
    जीवन के
    राग लिए
    सुख के क्षण रह जाएँ ,
    हवन कुण्ड
    धुआँ भरे
    सीली समिधाएँ हैं |...बिल्कुल सत्य कहा आपने,प्रेरक गीत।

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    Replies
    1. सादर अभिवादन |हार्दिक आभार आपका |

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