Tuesday, 11 May 2021

एक प्रेमगीत -हो न हो मौसम बदल जाये

 

चित्र -साभार गूगल 

एक प्रेम गीत -हो न हो मौसम बदल जाये 

भींगते 
इन फूल ,पत्तों में 
चाँदनी  हँसकर फिसल जाये |
थाम लूँ 
मैं दौड़कर उसको 
हो न हो मौसम बदल जाये |

यह उदासी 
तोड़ दे शायद 
घास पर बैठी हुई तितली ,
हमें तिरना 
भी सिखा देगी 
धार में बहती हुई मछली ,
होंठ से छूना  
मेरी वंशी   
प्रेम भींगा स्वर निकल जाये |

पी रहे हैं
हम हवा में विष 
ख़ुशबुओं का द्वार खुल जाये ,
फिर जवाबी 
ख़त मिले कोई 
अजनबी का प्यार मिल जाये ,
माथ  पर 
बालार्क सी टिकुली 
गहन अँधेरा निगल जाये |

फिर सिन्दूरी 
मेघ संध्या के 
इंद्रधनु की याद में खोये ,
अंकुरित 
होने लगे सपने 
जो किसी ने नयन में बोये ,
हमें सागर 
तट मिले मोती 
ज्वार सा यह मन उछल जाये |

कवि -जयकृष्ण राय तुषार 
   
चित्र -साभार गूगल 

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