Saturday, 15 May 2021

एक गीत -नदिया तो पानी के गीत सिर्फ़ गाती है

 

चित्र -साभार गूगल 


एक गीत -नदिया तो पानी के गीत सिर्फ़ गाती है 


यह दुनिया 
प्यासी है 
प्यास लिए आती है |
नदिया तो 
पानी के  
गीत सिर्फ़ गाती है |

नदिया तो 
मेघों की 
आँखों का पानी है ,
कंकड़ ,पत्थर
राख और
रेत की कहानी है ,
कौन इसे 
बाँचेगा 
बिना लिखी पाती है |

खुश रहे 
बबूलों में, 
वासंती फूलों में ,
इसने कब 
फर्क किया 
पर्वत और धूलों में ,
लहरों पे 
पान -फूल 
और दिया -बाती है |

मछ्ली 
मल्लाहों की 
यह जीवन रेखा है ,
मौसम ने 
इसका 
हर रंग -रूप देखा है ,
रामकथा 
केवट 
संवाद यह सुनाती है|

तट पर 
उत्सव -तीरथ 
आरती ,शिवाले हैं ,
कटे -फटे 
कूल कहीं 
पंछी ,मृगछाले हैं ,
ज्ञानी 
अज्ञानी को 
मंत्र यह सिखाती है |

कवि -जयकृष्ण राय तुषार 
चित्र -साभार गूगल 


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