| चित्र -साभार गूगल |
एक गीत -नदिया तो पानी के गीत सिर्फ़ गाती है
यह दुनिया
प्यासी है
प्यास लिए आती है |
नदिया तो
पानी के
गीत सिर्फ़ गाती है |
नदिया तो
मेघों की
आँखों का पानी है ,
कंकड़ ,पत्थर
राख और
रेत की कहानी है ,
कौन इसे
बाँचेगा
बिना लिखी पाती है |
खुश रहे
बबूलों में,
वासंती फूलों में ,
इसने कब
फर्क किया
पर्वत और धूलों में ,
लहरों पे
पान -फूल
और दिया -बाती है |
मछ्ली
मल्लाहों की
यह जीवन रेखा है ,
मौसम ने
इसका
हर रंग -रूप देखा है ,
रामकथा
केवट
संवाद यह सुनाती है|
तट पर
उत्सव -तीरथ
आरती ,शिवाले हैं ,
कटे -फटे
कूल कहीं
पंछी ,मृगछाले हैं ,
ज्ञानी
अज्ञानी को
मंत्र यह सिखाती है |
कवि -जयकृष्ण राय तुषार
