Sunday, 18 January 2026

एक पुराना गीत -यह वसंत

 

चित्र साभार गूगल




एक गीत -यह वसंत भी प्रिये !
 तुम्हारे होठों का अनुवाद है 

तुमसे ही 
कविता में लय है 
जीवन में संवाद है |
यह वसंत भी 
प्रिये ! तुम्हारे 
होठों का अनुवाद है |

तुम फूलों के 
रंग ,खुशबुओं में 
कवियों के स्वप्नलोक में ,
लोककथाओं 
जनश्रुतियों में 
प्रेमग्रंथ में कठिन श्लोक में ,
जलतरंग पर 
खिले कमल सी 
भ्रमरों का अनुनाद है |

तुम्हें परखने 
और निरखने में 
सूखी कलमों की स्याही ,
कालिदास ने 
लिखा अनुपमा 
हम तो एक अकिंचन राही
तेरा हँसना 
और रूठना 
प्रियतम का आह्लाद है |
चित्र -गूगल से साभार 

14 comments:

  1. यह वसंत भी
    प्रिये ! तुम्हारे
    होठों का अनुवाद है |
    Wahhh

    ReplyDelete
    Replies
    1. आपका हार्दिक आभार. सादर अभिवादन

      Delete
  2. अति मनमोहक गीत है सर।
    सादर।
    -----
    नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना मंगलवार २० जनवरी २०२६ के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    सादर
    धन्यवाद।

    ReplyDelete
  3. मनमोहक है "होठों का अनुवाद"

    ReplyDelete
  4. Replies
    1. हार्दिक आभार आपका. सादर अभिवादन

      Delete
  5. वाह!वाह!सुंदर गीत बन पड़ी।
    बधाई

    ReplyDelete
  6. बहुत सुंदर गीत तुषार जी !

    ReplyDelete
    Replies
    1. आपका हृदय से आभार. सादर अभिवादन

      Delete
  7. हम तो एक अकिंचन राही
    तेरा हँसना
    और रूठना
    प्रियतम का आह्लाद है |///
    वाह! शब्द शब्द अनुराग भरी अभिव्यक्ति! बहुत सुंदर मोहक सृजन तुषार जी 🙏🌹🌹

    ReplyDelete

आपकी टिप्पणी हमारा मार्गदर्शन करेगी। टिप्पणी के लिए धन्यवाद |

एक पुराना होली गीत -आम कुतरते हुए सुए से

    चित्र -गूगल से साभार  आप सभी को होली की बधाई एवं शुभकामनाएँ  एक गीत -होली  आम कुतरते हुए सुए से  मैना कहे मुंडेर की | अबकी होली में ले आ...