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| चित्र साभार गूगल |
एक गीत -यह वसंत भी प्रिये !
तुम्हारे होठों का अनुवाद है
तुमसे ही
कविता में लय है
जीवन में संवाद है |
यह वसंत भी
प्रिये ! तुम्हारे
होठों का अनुवाद है |
तुम फूलों के
रंग ,खुशबुओं में
कवियों के स्वप्नलोक में ,
लोककथाओं
जनश्रुतियों में
प्रेमग्रंथ में कठिन श्लोक में ,
जलतरंग पर
खिले कमल सी
भ्रमरों का अनुनाद है |
तुम्हें परखने
और निरखने में
सूखी कलमों की स्याही ,
कालिदास ने
लिखा अनुपमा
हम तो एक अकिंचन राही
तेरा हँसना
और रूठना
और रूठना


यह वसंत भी
ReplyDeleteप्रिये ! तुम्हारे
होठों का अनुवाद है |
Wahhh
आपका हार्दिक आभार. सादर अभिवादन
Deleteअति मनमोहक गीत है सर।
ReplyDeleteसादर।
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नमस्ते,
आपकी लिखी रचना मंगलवार २० जनवरी २०२६ के लिए साझा की गयी है
पांच लिंकों का आनंद पर...
आप भी सादर आमंत्रित हैं।
सादर
धन्यवाद।
नमस्कार. आभारी हूँ
Deleteमनमोहक है "होठों का अनुवाद"
ReplyDeleteधन्यवाद
Deleteबहुत सुंदर गीत
ReplyDeleteहार्दिक आभार आपका. सादर अभिवादन
Deleteवाह!वाह!सुंदर गीत बन पड़ी।
ReplyDeleteबधाई
हार्दिक सादर अभिवादन
Deleteबहुत सुंदर गीत तुषार जी !
ReplyDeleteआपका हृदय से आभार. सादर अभिवादन
Deleteहम तो एक अकिंचन राही
ReplyDeleteतेरा हँसना
और रूठना
प्रियतम का आह्लाद है |///
वाह! शब्द शब्द अनुराग भरी अभिव्यक्ति! बहुत सुंदर मोहक सृजन तुषार जी 🙏🌹🌹
आपका हृदय से आभार.
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