Thursday, 29 January 2026

एक ताज़ा गीत -बांसुरी वाले अधर

 

चित्र साभार गूगल

एक ताज़ा गीत -कहाँ हैं वो खिलखिलाते गाँव 


कहाँ हैं 
वो खिलखिलाते 
गाँव वो हँसते शहर.
कहाँ हैं 
वो डाकिए 
लाते हुए अच्छी ख़बर.

रंग फागुन के 
हुए मैले 
न टेसू खिल रहे,
मोड़ पर 
तन्हा मुसाफिर 
पर कहाँ हम मिल रहे,
मौसमों की 
आँख पीली 
हो गयी धुंधली नज़र.

फूल बासी 
चढ़ रहे हैं 
देवता के माथ पर,
नहीं मेहंदी 
हलद के रंग 
चाँदनी के हाथ पर,
मिल रहे हैं 
खुशबुओं के
संग हवाओं में ज़हर.

नदी वन के 
पास कैसा 
मौन है वातावरण,
गीत बासी हैं 
किताबों में
सुभग बस आवरण,
बहुत दिन
हो गए देखे
बांसुरी वाले अधर.

कवि/गीतकार जयकृष्ण राय तुषार
चित्र साभार गूगल


6 comments:

  1. बेहद सुंदर गीत सर।
    सादर।
    -------

    जी नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना शुक्रवार ३० जनवरी २०२६ के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    सादर
    धन्यवाद।

    ReplyDelete
    Replies
    1. आपका हार्दिक आभार. सादर अभिवादन

      Delete
  2. कहाँ हैं
    वो डाकिए
    लाते हुए अच्छी ख़बर.
    Wahh - बहुत सुंदर

    ReplyDelete
  3. सुंदर गीत!!

    ReplyDelete
    Replies
    1. आपका हृदय से आभार. सादर अभिवादन

      Delete

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