Saturday, 24 January 2026

एक गीत -फूलों में गंध नहीं

 

चित्र साभार गूगल

एक नवगीत -जेब कटी फागुन की 

जेब फटी 

फागुन की 

झर गए ग़ुलाल.

फूलों में 

गंध नहीं 

मौसम कंगाल.


चैता के 

गीत कहाँ 

शहरों के हिस्से,

वक़्त की 

किताबों में 

टेसू के किस्से,

स्मृतियों में

मृदंग

बजते करताल.


रफू किए

चुनरी में

वासंती खेत में,

हिरण

झुण्ड प्यासा है

नदियों की रेत में

मौसम की

आँखों में

टूटा है बाल.


चित्र साभार गूगल


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एक गीत -फूलों में गंध नहीं

  चित्र साभार गूगल एक नवगीत -जेब कटी फागुन की  जेब फटी  फागुन की  झर गए ग़ुलाल. फूलों में  गंध नहीं  मौसम कंगाल. चैता के  गीत कहाँ  शहरों के ...