एक गीत -याद करो फिर क़सम राम की
सबका साथ
विकास सभी का
याद करो फिर क़सम राम की.
सही राह पर
लौटो भाई
नहीं लड़ाई किसी काम की.
अगड़ा, पिछड़ा
दलित छोड़ दो
दुश्मन का षड्यंत्र तोड़ दो,
अभी सनातन की
जय बोलो
हर आँधी की दिशा मोड़ दो.
संतो बनो
संत के जैसा
महिमा घटे न चार धाम की.
सिंहासन है
राम खड़ाऊ
भरत, लाल सा चरित बनाओ,
राजधर्म है
कठिन तपस्या
मातृभूमि की महिमा गाओ,
अब भी
सुनो अयोध्या जाकर
सरयू कहती कथा राम की.
तुलसी को
रैदास को समझो
समझो दास कबीरा को,
राजमहल को
मिट्टी समझो
पढ़लो भाई मीरा को,
गौरव गाथा
लिखो सुनहरी
भारत माँ के पुण्य धाम की.
काशी में
गंगा के तट पर
डिम-डिम-डिम डमरू बाजे,
मुरली की
धुन यमुना तीरे
वृंदावन में भक्ति विराजे,
नदी, नर्मदा
कावेरी में
सजी रहे आरती शाम की.
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| प्रभु श्रीराम वनवास में |



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