Saturday, 3 January 2026

चलो मुश्किलों का हल ढूंढे खुली किताबों में

 

आदरणीय श्री रमेश ग्रोवर जी और श्री आमोद माहेश्वरी जी



एक पुराना गीत सन 2011 में लिखा गया

 चलो मुश्किलों का हल ढूँढें खुली किताबों में 

मित्रों दिल्ली में विश्व पुस्तक मेला 10 जनवरी से 18 जनवरी को लगने वाला है. पुस्तकें सच्ची मित्र होती हैं.


बीत रहे हैं 

दिन सतरंगी 

केवल  ख़्वाबों में |

चलो मुश्किलों 

का हल ढूँढें 

खुली  किताबों में |


इन्हीं किताबों में 

जन- गण -मन 

तुलसी की चौपाई ,

इनमें ग़ालिब -

मीर ,निराला 

रहते हैं परसाई ,

इनके भीतर 

जो खुशबू वो 

नहीं  गुलाबों में |


इसमें कई 

विधा के गेंदें  -

गुड़हल खिलते हैं ,

बंजर  मन  

को इच्छाओं  के  

मौसम मिलते हैं |

लैम्पपोस्ट में 

पढ़िए या फिर 

दफ़्तर, ढाबों में |


तनहाई से 

हमें किताबें 

दूर भगाती हैं ,

ज्ञान अगर 

खुद सो जाए 

तो उसे जगाती हैं ,

इनमें  जो 

परवाज़ ,कहाँ 

होती सुर्खाबों में ?


इनको पढ़कर 

कई घराने 

गीत सुनाते हैं ,

इनकी  जिल्दों में 

जीवन के रंग 

समाते हैं ,

ये न्याय सदन ,

संसद के सारे 

प्रश्न -जबाबों में |





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