Friday, 5 August 2011

एक गीत -मौसमों के आधीन रहे

चित्र -गूगल से साभार 
मौसमों के आधीन रहे 
सूखा हो 
या बाढ़ 
मौसमों  के आधीन रहे |
मेघदूत 
अब खेतों की 
हरियाली छीन रहे |

परजा का दुःख 
भूले आये कितने 
राजा -रानी ,
आदमखोर 
व्यवस्था की 
कुछ बदली नहीं कहानी ,
आजादी के 
सपने 
कागज पर रंगीन रहे |

इंदर राजा 
राजसभा में 
मुजरे देख रहे ,
मौन सभासद 
अपनी -अपनी 
रोटी सेंक रहे ,
हम महलों के 
कचराघर में 
कूड़ा  बीन रहे |

आंधी -पानी 
तेज हवा के 
झोंकों से लड़ते ,
हम हारिल 
पंजे में सूखी 
टहनी ले उड़ते ,
आराकश 
बस पेड़ 
काटने में तल्लीन रहे |

मेले -हाट 
प्रदर्शनियाँ सब 
शहरों के हिस्से ,
भूखे पेट 
कहाँ तक सुनते 
अम्मी के किस्से ,
अपनी दुआ 
कुबूल कहाँ 
उनकी आमीन रहे |

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