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| चित्र -गूगल से साभार |
कहाँ बादल के टुकड़े रेत के टीलों में होते हैं
सफ़र में दूरियां अब तो सिमट जाती हैं लम्हों में
दिलों के फासले लेकिन कई मीलों में होते हैं
जरा सा वक्त है बैठो मेरे अशआर तो सुन लो
मोहब्बत के फ़साने तो कई रीलों में होते हैं
ये गमले, बोनसाई छोड़कर आओ तो दिखलायें
कमल के फूल कितने रंग के झीलों में होते हैं
शहर से दूर लम्बी छुट्टियों के बीच तनहा हम
हरे पेड़ों ,तितलियों और अबाबीलों में होते हैं
हम इक मजदूर हैं प्यासे ,हमें पानी नहीं मिलता
हमारी प्यास के चर्चे तो तहसीलों में होते हैं
कहानी में ही बस राजा गरीबों से मिला करते
हकीकत में तो केवल राम ही भीलों में होते है
खण्डहरों का भी एक माज़ी इन्हें नफ़रत से मत देखो
तिलस्मी तख़्त -सिंहासन इन्ही टीलों में होते हैं

