Wednesday, 1 September 2021

एक सामयिक ग़ज़ल-बम औ बंदूक से दुनिया है परेशान मियां

 


एक सियासी ग़ज़ल मौजूदा स्थिति पर


मुल्क को मुल्क बनाते हैं बस इन्सान मियां

बम औ बंदूक से दुनिया है परेशान मियां


नाम हमदर्दी का साज़िश है बड़े लोगों की

बन्द बोतल से निकल आये हैं शैतान मियां


औरतों,बच्चों को क़ातिल के हवाले करके

अपने ही मुल्क से धोखा किये अफ़गान मियां


ख़्वाब कश्मीर का अब देखना छोड़ो प्यारे

सन इकहत्तर को नहीं भूलना इमरान मियां


हम अहिंसा के पुजारी है मगर याद रहे

है निहत्था नहीं कोई मेरा भगवान मियां



10 comments:

  1. बेहतरीन ग़ज़ल कही है तुषार जी आपने।

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  2. आपकी इस प्रविष्टि के लिंक की चर्चा 02.09.2021 को चर्चा मंच पर होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है।
    धन्यवाद
    दिलबागसिंह विर्क

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    Replies
    1. हार्दिक आभार आदरणीय विर्क साहब

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  3. हम अहिंसा के पुजारी है मगर याद रहे

    है निहत्था नहीं कोई मेरा भगवान मियां

    बहुत खूब,लाजबाब सृजन,सादर नमन आपको

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  4. सच लाजवाब ,हर देशवासी के मन में यह जज्बा होना चाहिए।
    बहुत सुंदर।

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  5. हम अहिंसा के पुजारी है मगर याद रहे

    है निहत्था नहीं कोई मेरा भगवान मियां
    बहुत खूब 👌👌

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