Sunday, 8 February 2026

एक प्रेम गीत लोकभाषा में -प्रेम क रंग

  

चित्र साभार गूगल

एक लोकभाषा गीत-

प्रेम क रंग निराला हउवै


सिर्फ़ एक दिन प्रेम दिवस हौ

बाकी मुँह पर ताला हउवै

ई बाजारू प्रेम दिवस हौ

प्रेम क रंग निराला हउवै


सबसे बड़का प्रेम देश की

सीमा पर कुर्बानी हउवै

प्रेम क सबसे बड़ा समुंदर

वृन्दावन कै पानी हउवै

प्रेम भक्ति कै चरम बिंदु हौ

तुलसी कै चौपाई हउवै

सूरदास,हरिदास,सुदामा

ई तौ मीराबाई हउवै

प्रेम क मन हौ गंगा जइसन

प्रेम क देह शिवाला हउवै


प्रेम मतारी कै दुलार हौ

बाबू कै अनुशासन हउवै

ई भौजी कै हँसी-ठिठोली

गुरु क शिक्षा,भाषन हउवै

बेटी कै सौभाग्य प्रेम हौ

बहिन क रक्षाबन्धन हउवै

सप्तपदी कै कसम प्रेम हौ

हल्दी,सेन्हुर,चन्दन हउवै

आज प्रेम में रंग कहाँ हौ

एकर बस मुँह काला हउवै


प्रेम न माटी कै रंग देखै

प्रेम नदी कै धारा हउवै

ई पर्वत घाटी फूलन कै

खुशबू कै फ़व्वारा हउवै

जइसे सजै होंठ पर वंशी

वइसे अनहद नाद प्रेम हौ

एके ढूँढा नहीं देह में

मन से ही संवाद प्रेम हौ

प्रेम न राजा -रंक में ढूंढा

ई गोकुल कै ग्वाला हउवै

कवि -जयकृष्ण राय तुषार 


चित्र साभार गूगल
चित्र साभार गूगल


6 comments:

  1. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" पर सोमवार 9 फ़रवरी 2026 को लिंक की गयी है....

    http://halchalwith5links.blogspot.in
    पर आप सादर आमंत्रित हैं, ज़रूर आइएगा... धन्यवाद!

    !

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  2. Replies
    1. हार्दिक आभार आपका. सादर अभिवादन

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  3. वाह! मनभावन सुंदर गीत

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    Replies
    1. आपका हृदय से आभार. सादर अभिवादन

      Delete

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