Thursday, 22 January 2026

एक ताज़ा गीत -प्रेम गीत लिखने लगा फूलों में इतवार

 

चित्र साभार गूगल

एक ताज़ा गीत -फूलों में इतवार 


गीत, पपीहा 

बांसुरी 

वासंती श्रृंगार.

प्रेमगीत 

लिखने लगा 

फूलों में इतवार.


पीली -नीली 

चिट्ठियां 

वन में पढ़े पलाश,

नदी किनारे 

खाट पर 

मौसम खेले ताश,

सुबह 

हवा में उड़ रहे 

मेजों से अख़बार.


तन्हा बैठे 

फूल को 

फिर तितली की याद,

मौन मुखर 

करने लगा 

आँखों से संवाद,

रंगमंच पर

प्रकृति के

बदल गए किरदार.


पीली सरसों 

देखकर 

प्रमुदित हुए किसान,

गलियाँ

होरी गा रहीं

खाकर मगही पान.

सारंगी 

शहनाइयां 

बजने लगे सितार.


कवि /गीतकार

जयकृष्ण राय तुषार

चित्र साभार गूगल


4 comments:

  1. वाह! कितने सुंदर प्रतीक सजे हैं रचना में 👌👌😊🙏

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    1. मुझे आपकी थोक कमेंट्स से बहुत बड़ा खजाना मिल गया. सादर अभिवादन रेणु जी

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