Saturday, 24 January 2026

एक गीत -फूलों में गंध नहीं

 

चित्र साभार गूगल

एक नवगीत -जेब कटी फागुन की 

जेब फटी 

फागुन की 

झर गए ग़ुलाल.

फूलों में 

गंध नहीं 

मौसम कंगाल.


चैता के 

गीत कहाँ 

शहरों के हिस्से,

वक़्त की 

किताबों में 

टेसू के किस्से,

स्मृतियों में

मृदंग

बजते करताल.


रफू किए

चुनरी में

वासंती खेत में,

हिरण

झुण्ड प्यासा है

नदियों की रेत में

मौसम की

आँखों में

टूटा है बाल.


चित्र साभार गूगल


10 comments:

  1. बसंत की बाट जोहते ह्रदय की एक अनकही टीस हैं रचना में! हमारी पीढ़ी ने तो विशुद्ध बसंत को देखा है जिया है, पर हमारी भावी पीढ़ियां क्या देखेंगी और कैसे जान पाएगी
    उस बसंत के बारे में 🙏😟

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    1. आपका हृदय से आभार. सादर अभिवादन

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  2. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द शनिवार 31 जनवरी , 2026 को लिंक की जाएगी .... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!

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  3. किताबों में
    टेसू के किस्से,
    वाह - वाह

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    1. आपका हार्दिक आभार. सादर अभिवादन

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  4. मार्मिक पर मीठी सी रचना

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    1. हार्दिक आभार आपका. सादर अभिवादन

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  5. Replies
    1. आपका हृदय से आभार. सादर अभिवादन

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