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| संत विवेकानंद जी |
एक देशगान -भारत माँ के युवा सपूतों
भारत माँ के
युवा सपूतों
फूलों का मकरन्द बनो.
आर्यभट्ट,
अब्दुल कलाम
या संत विवेकानंद बनो.
राष्ट्र गीत के
साथ भोर हो
हर घर लगा तिरंगा हो,
बेटे बनें
भागीरथ जैसे
बेटी सरयू-गंगा हो.
दिए जलाओ
अंधियारे में
हर पथ का आनंद बनो.
सबसे सुन्दर
देश हमारा
संविधान भी प्यारा है,
पर्वत घाटी
सागर, नदियां
हर मौसम ही न्यारा है,
देश प्रेम से
बड़ा नहीं कुछ
साथी मत जयचंद बनो.
भारत माँ
देवों को प्यारी
यह मिट्टी बलिदानी है,
चंदन की
खुशबू समीर में
अमृत जैसा पानी है,
अपने अंदर
कंस न पालो
वासुदेव या नन्द बनो.
कवि -जयकृष्ण राय तुषार
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| भारत माता |


बहुत ही सुंदर गीत है यह तुषार जी। कंठस्थ करके सुनाने योग्य।
ReplyDeleteआभार सर. सादर अभिवादन
Deleteबहुत सुंदर गीत,आदरणीय सर
ReplyDeleteसादर अभिवादन. आभार आपका
Deletebahut sunder
ReplyDeleteहार्दिक आभार भाई साहब. अभिवादन
Deleteसच कहूँ, यह कविता पढ़कर अंदर एक अलग ही ऊर्जा जागती है। आपने बहुत सरल शब्दों में देशभक्ति को दिल तक पहुँचा दिया। मुझे खास तौर पर आर्यभट्ट, कलाम और विवेकानंद वाले संदर्भ बहुत प्रेरित करते हैं।
ReplyDeleteहार्दिक आभार सर
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