Monday, 30 August 2021

एक गीत सामयिक-फिर बनो योगेश्वर कृष्ण

 


एक सामयिक गीत

फिर बनो योगेश्वर कृष्ण


फिर बनो

योगेश्वर कृष्ण

उठो हे पार्थ वीर ।

हे सूर्य वंश के

राम

उठा कोदण्ड- तीर ।


जल रहा

शरीअत की

भठ्ठी में लोकतंत्र,

अब भारत

ढूंढे विश्व-

शान्ति का नया मन्त्र,

भर गयी

राक्षसी 

गन्धों से पावन समीर।


इन महाशक्तियों

के प्रतिनिधि

अन्धे, बहरे,

ये सभी

दशानन हैं

इनके नकली चेहरे,

सब अपने

अपने स्वार्थ

के लिए हैं अधीर।


इतिहास

लिखेगा कैसे

इस युग को महान,

नरभक्षी

रक्तपिपासु

घूमते तालिबान,

रावलपिंडी

दे रही

इन्हें मुग़लई खीर ।



चलो मुश्किलों का हल ढूंढे खुली किताबों में

  आदरणीय श्री रमेश ग्रोवर जी और श्री आमोद माहेश्वरी जी एक पुराना गीत सन 2011 में लिखा गया  चलो मुश्किलों का हल ढूँढें खुली किताबों में  मित्...