Monday, 23 August 2021

एक गीत-रख गया मौसम सुबह अंगार फूलों पर

 


एक गीत-रख गया मौसम सुबह अंगार फूलों पर


रख गया

मौसम 

सुबह अंगार फूलों पर ।


वक्त पर

लम्बे-घने

तरु भी हुए बौने,

रेत 

नदियों में

पियासे खड़े मृगछौने,

ताक में

अजगर

शिकारी नदी कूलों पर ।


सूर्य भी

छिपने लगा 

है बादलों के घर,

हो गए हैं

सभ्यता के

आज कातर स्वर,

घोसलों पर,

चील के 

कब्जे बबूलों पर ।


हो गयी

दुनिया तमाशा

वक्त भी बुज़दिल,

अब अहिंसा से

विजय का

पथ हुआ मुश्किल,

इस सदी में

कौन कायम

है उसूलों पर ।

कवि जयकृष्ण राय तुषार

चित्र साभार गूगल


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