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Thursday, 5 November 2026

एक प्रेमगीत -गीत होठो पर सजाकर

 

चित्र साभार गूगल 


एक पुराना गीत 

एक प्रेम गीत-बाँसुरी मैं छोड़ दूँगा गीत अधरों पर सजाकर


आलमारी में

कहीं फिर

भागवत रख दो सजाकर ।

पास में 

बैठो हमारे 

नेह का कम्बल बिछाकर ।


ये कुशा

गंगाजली रख दो

न कोई मंत्र बोलो ,

धूम्र से 

निकलो हवन के

स्वप्नदर्शी नयन खोलो,

काटना

फिर से चिकोटी

और छिप जाना लजाकर ।


टकटकी

बाँधे हुए मौसम

गगन में चाँदनी है,

पास में

गुलमोहरों के

फूल,पेंटिंग मधुबनी है,

चलो छत पर

टहल आएं

नींद में शिशु को सुलाकर ।


डायरी के

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सप्त सुर के पाठ वाले,

इन्हीं शब्दों

से खुलेंगे

सभी धागे गाँठ वाले,

बाँसुरी मैं

छोड़ दूँगा

गीत अधरों पर सजाकर ।

चित्र साभार गूगल 


कवि -जयकृष्ण राय तुषार

एक प्रेमगीत -गीत होठो पर सजाकर

  चित्र साभार गूगल  एक पुराना गीत  एक प्रेम गीत-बाँसुरी मैं छोड़ दूँगा गीत अधरों पर सजाकर आलमारी में कहीं फिर भागवत रख दो सजाकर । पास में  बै...