Sunday, 1 November 2026

एक पुराना गीत -बुन रही होगी शरद की चाँदनी

 

चित्र -गूगल से साभार 


एक गीत -बुन रही होगी शरद की चांदनी 

बुन रही होगी 
शरद की 
चांदनी स्वेटर गुलाबी |

दबे पांवों 
सीढ़ियाँ चढ़ 
हम छतों पर टहल आयें ,
कनखियों 
से देखकर फिर 
होठ काटें मुस्कुरायें ,
चलो ढूंढें 
फिर दराजों में 
पुराने ख़त जबाबी |

बांसुरी से 
कहाँ मुमकिन 
कठिन ऋतुओं को रिझाना ,
शाल ओढ़े 
कहीं देवानंद 
बनकर गुनगुनाना ,
नहीं होते हैं 
कहीं संगीत 
चिड़ियों के किताबी |

शून्य में 
अपलक निहारे 
टिमटिमाते हुए तारे ,
अब दिशाओं में 
नहीं माँ बोल 
मीठे हैं तुम्हारे !
कहीं अपनापन 
नहीं है 
ढूंढ आया किचन ,लाबी |

एक पुराना गीत -बुन रही होगी शरद की चाँदनी

  चित्र -गूगल से साभार  एक गीत -बुन रही होगी शरद की चांदनी  बुन रही होगी  शरद की  चांदनी स्वेटर गुलाबी | दबे पांवों  सीढ़ियाँ चढ़  हम छतों पर ...