Tuesday, 3 November 2026

एक गीत -दीपावली -रेशम के घूँघट में चाँदनी

 

चित्र साभार गूगल 
प्रतिष्ठित अभिनेत्री साई पल्लवी जी 
आप सभी को दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें 

एक गीत -रेशम के घूँघट में 


रेशम के 

घूँघट में हँसकर 

करे चाँदनी बात.

रंगोली की 

आभा सुंदर 

दीवाली की रात.


गांठ जोड़कर 

पूजा करती 

बहू नवेली है,

टीका, चंदन 

रोली, अक्षत 

सखी सहेली है,

मोदक, मिश्री 

लेकर बैठे 

आँगन थाल परात.


फूलों की 

माला, सुगंध से 

सँवरा है मौसम,

राम सिया के 

सरयू तट पर 

दीपों का संगम,

प्रमुदित ऋषि -

मुनि,वानर, भालू,

प्रमुदित कोल -किरात.


मेंहदी रची 

उँगलियाँ 

घी में डुबो रहीं बाती,

तुलसी के 

चौरे पर अम्मा 

मन में कुछ गाती,

खुले गगन का 

उत्सव है यह 

तम्बू बिना कनात.


धनकुबेर संग 

प्रमुदित गणपति 

महालक्ष्मी माता,

धरती का 

मानव ही कितने 

उत्सव यहाँ मनाता.

गली -गली 

फुलझड़ी, पटाखे 

जैसे हो बारात.

चित्र साभार गूगल 


2 comments:

  1. बहुत सुंदर गीत प्रस्तुत किया है तुषार जी आपने। आपको एवं आपके प्रियजनों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं।

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  2. आपको भी बहुत बहुत शुभकामनायें. सादर अभिवादन

    ReplyDelete

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एक गीत -दीपावली -रेशम के घूँघट में चाँदनी

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