Wednesday, 20 November 2024

एक गीत -सर्द मौसम

 

चित्र साभार गूगल 

एक गीत -सर्द मौसम 

बर्फ़ में गुलमर्ग 

औली 

और शिमला है.

सर्द मौसम में 

गुलाबी 

कोट निकला है.


छतें 

स्वेटर बुन रही हैं 

भाभियों वाली,

बतकही, चुगली 

कड़कती 

चाय की प्याली,

लाँन में 

हर फूल 

खुशबू और गमला है.


हवा ठंडी 

काँपती सी 

लहर नदियों की,

याद आई 

फिर कहानी 

कई सदियों की,

चाँद 

पूनम का भी 

अबकी बार धुंधला है.


पेड़ से 

उड़कर जमीं 

पर लौट आए हैं,

ओंस में 

भींगे परिंदे 

कुनमुनाये हैं,

मौसमी 

दिनमान 

का भी रंग बदला है.

कवि -जयकृष्ण राय तुषार

चित्र साभार गूगल 




चलो मुश्किलों का हल ढूंढे खुली किताबों में

  आदरणीय श्री रमेश ग्रोवर जी और श्री आमोद माहेश्वरी जी एक पुराना गीत सन 2011 में लिखा गया  चलो मुश्किलों का हल ढूँढें खुली किताबों में  मित्...