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| चित्र साभार गूगल |
एक प्रेम गीत
इत्र से भींगे
हुए रुमाल
वाले दिन .
लौट आ
ओ आरती के
थाल वाले दिन.
तुम्हें देखा
याद आए
खुशबुओं के ख़त,
चाँदनी रातें
सुहानी
और सूनी छत,
राग में
डूबे हुए
करताल वाले दिन.
झील में
गौरांग परियों की
कथाओं की,
मंदिरों के
शिखर मंगल -
ध्वनि, ऋचाओं की,
स्वप्न में
कश्मीर, केसर
शाल वाले दिन.
देर तक
एकांत में
भूले कहाँ वो दिन,
दरपनों में
मुस्कुराहट
और जूड़े पिन,
लाल, पीले
बैगनी से
गाल वाले दिन.
कवि जयकृष्ण राय तुषार
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| चित्र साभार गूगल |
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