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| चित्र साभार गूगल |
दुनिया को युद्ध से बचाना
बेला के
फूलों को
केस में सजाना.
ओ अशांति
दुनिया को
युद्ध से बचाना.
चिड़ियों के
पँख बचे
नदियों में धार रहे,
बारूदी गंध
मिटे
दुनिया में प्यार रहे,
ओ वंशीधर
अपनी
बॉसुरी बजाना.
राग बचे
रंग बचे
पानदान पान रहे,
पूरब से
पश्चिम तक
मोहक मुस्कान रहे,
झुकी हुई
नज़रों में
आग मत सजाना.
इंद्रधनुष
क्षितिजों पर
सावन में आएंगे,
झील -ताल
भींगेंगे
प्रेम गीत गाएंगे,
मिलने को
ढूंगेंगे
लोग फिर बहाना.
दम्भ लिए
चेहरों पर
कोमल सा भाव खिले,
हिंसा की
पगडण्डी को
फिर से बुद्ध मिले,
धूप के
कटोरे में
चाँदनी सजाना.
कवि -जयकृष्ण राय तुषार
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| चित्र साभार गूगल |


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