Monday, 10 January 2022

यश मालवीय का गीत-राधा से ही नहीं जुड़े है मीरा से भी धागे

 

गीत कवि यश मालवीय 
एक भक्ति गीत-
गीतकार यश मालवीय
यश मालवीय हिंदी के अप्रतिम गीत कवि हैं।इनका जन्म 1962 में कानपुर में हुआ था ।देश की सभी प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में,साझा संकलनों में गीत अनवरत प्रकाशित होते रहते हैं।कहो सदाशिव,एक चिड़िया अलगनी पर,बुद्ध मुस्कुराए,रोशनी देती बीड़ियाँ,समय लकड़हारा,नींद कागज की तरह,काशी नहीं जुलाहे की,उड़ान से पहले इनके प्रमुख नवगीत संग्रह हैं।चिंगारी के बीज इनका दोहा संग्रह है।सम्प्रति महालेखाकार कार्यालय इलाहाबाद में कार्यरत।

चित्र साभार गूगल


राधा से ही नहीं जुड़े हैं मीरा से भी धागे


चलो बाँट ले आपस में मिल

सुख-दुःख आधा-आधा

गोकुल से बरसाने तक है

केवल राधा-राधा


कुन्ज गली से निकलें

जमुना के तट पर हो आएं

अपने से जब मिलना हो तो

थोड़ा सा छुप जाएँ

खुलकर मिलने-जुलने में है

आख़िर कैसी बाधा ?


रास रचैया,धेनु चरैया

सोते में भी जागे

राधा से ही नहीं जुड़े हैं

मीरा से भी धागे

ख़ुद का आराधन कर बैठे

जब तुमको आराधा 


क़दम क़दम गोकुल वृंदावन

मथुरा की हैं गलियाँ

सूरदास की आँखों को भी

दी हैं दीपावलियाँ 

जितना मोरपंख सा जीवन

उतना ही है सादा


गीतकार-यश मालवीय


10 comments:

  1. बेहतरीन रचना।

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    1. हार्दिक आभार आपका अनुराधा जी

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  2. आपकी इस प्रविष्टि के लिंक की चर्चा कल बुधवार (12-01-2022) को चर्चा मंच     "सन्त विवेकानन्द"  जन्म दिवस पर विशेष  (चर्चा अंक-4307)     पर भी होगी!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य यह है कि आप उपरोक्त लिंक पर पधार कर चर्चा मंच के अंक का अवलोकन करे और अपनी मूल्यवान प्रतिक्रिया से अवगत करायें।
    -- 
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'   

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  3. हार्दिक आभार आपका आदरणीय

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  4. अप्रतिम रचना, निस्संदेह। अंतिम पद में संभवतः 'मथुरा की हैं गलियाँ' होना चाहिए।

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    1. सर टायपिंग मिस्टेक की तरफ ध्यान दिलाने हेतु आपका हृदय से आभार।सादर प्रणाम

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  5. वाह!!!
    लाजवाब गीत।

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    1. हार्दिक आभार आपका।मकर संक्रांति की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं

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  6. सुन्दर प्रस्तुति!

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