Sunday, 25 September 2011

मेरा एक गीत -सुर साम्राज्ञी लता मंगेशकर के लिए

सुर साम्राज्ञी भारत रत्न -लता मंगेशकर 
लता को सुनना एक सदी को सुनना है |बस यहीं से मेरे जेहन में एक विचार आया की क्यों न इस महान गायिका के जन्म दि  पर एक  गीत लिखने की कोशिश की जाये |मित्रों लता जी का जन्म 28 सितम्बर 1929 को ब्रिटिश इंडिया में इंदौर में हुआ था |इनके पिता का नाम दीनानाथ मंगेशकर था जो कि गोमांतक मराठा समाज से थे |जब लता जी मात्र तेरह वर्ष की थीं तभी उनके सिर से पिता का साया उठ गया |लता जी के पिता के दोस्त थे नवयुग चित्र पट मूवी के मालिक विनायक दामोदर कर्नाटकी ,इन्होनें ही लता जी की देखभाल किया |सुप्रसिद्ध गायिका आशा भोसले ,हृदय नाथ मंगेशकर ,उषा मंगेशकर और मीना मंगेशकर, इन सब भाई बहनों में लता जी सबसे बड़ी हैं |लता जी के  प्रथम संगीत गुरू स्वयं इनके पिता थे |लता जी ने पांच वर्ष की उम्र से ही संगीत सीखना प्रारम्भ कर दिया |प्रारम्भ में फ़िल्मी दुनिया में लता जी की आवाज़ को पतली या [thin]कहा गया |लता जी के गायन का विधिवत सफ़र 1940-1942]से शुरू होता है |भारत की प्रादेशिक और विदेशी लगभग 36भाषाओँ में लता जी ने गाया |सन 1974-1991में गिनीज बुक में भी इनका नाम दर्ज़ हुआ |भारत के  सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से इनको सम्मानित किया गया |हम सदी की इस महान गायिका को अपना यह गीत समर्पित कर रहे हैं -
सदी की महान गायिका लता मंगेशकर जी को समर्पित
मेरा एक गीत [लता जी के जन्म दिन  28 सितम्बर पर विशेष  भेंट ]
सदी को सुन रहा हूँ मैं 
लता के 
गीत के कुछ फूल 
केवल चुन रहा हूँ मैं |
उन्हें सुनकर के 
लगता है 
सदी को सुन रहा हूँ मैं |

सुहागन 
चूड़ियों में भी 
उसी की धुन खनकती है ,
भरे फूलों से 
जंगल में कोई 
चिड़िया चहकती है ,

प्रशंसा में 
लिखूं तो क्या लिखूं  
सिर धुन रहा हूँ मैं |

उसी की धुन में 
मंदिर के पुजारी 
मन्त्र पढ़ते हैं ,
हम उसकी 
प्यास की खातिर 
सुनहरे शब्द गढ़ते हैं ,

सुरों के 
रेशमी धागों से 
खुद को  बुन रहा हूँ मैं |

सभी संगीत के 
सुर मिल के 
उसका सुर बनाते हैं ,
वतन के 
नाम पर भी हम 
उसी को गुनगुनाते हैं ,

वो सातो 
आसमानों में 
उसी को सुन रहा हूँ मैं |


तुम्हीं से 
जागतीं सुबहें ,
सुहानी शाम होती हैं ,
सुरों की 
हर कोई महफ़िल 
तुम्हारे नाम होती है ,


तुम्हें 
बचपन से सुनता हूँ 
मगर बे -धुन रहा हूँ मैं |

समन्दर 
भावनाओं का 
लता के दिल में बहता है ,
कि जैसे 
झील में कोई 
कमल का फूल रहता है ,

वो परियों 
की कहानी है 
उसी को गुन रहा हूँ मैं |

कवि जयकृष्ण राय तुषार
चित्र -गूगल से साभार 

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