Wednesday, 8 March 2023

कुछ दोहे -तुलसी के भी राम हैँ कबिरा के भी राम


सीता राम 



रामराज्य की देखिए सुंदर सी तस्वीर
तुलसी भी सुख चैन से दुःख में नहीं कबीर

निराकार, साकार कवि चाहे जो दे नाम
तुलसी के भी राम हैँ कबिरा के भी राम

खत्म हुआ वनवास फिर घर लौटे श्रीराम
दीपोत्सव की ज्योति में जगमग सरयू धाम

पशु, पक्षी, किन्नर, अधम वनवासी से प्यार
सकल सृष्टि कण मात्र में ईश्वर का संसार

बरसाना, ब्रजभूमि हो या सरयू का धाम
सबके राधा श्याम हैँ सबके सीता राम

काशी में सब पुण्य है शिव संग गंगा नीर
एक साथ में अर्घ्य दें वैष्णव, शैव, कबीर

ईश्वर सच्चे भक्त का करते हैँ उद्धार
राम प्रिया फिर हो गयी शबरी सी लाचार

पूजा, जप, तप, आस्था सत्य सनातन मूल
श्रद्धा हो सब ठीक है गुड़हल, गेंदा फूल

शुक्ल पक्ष में चैत में नवमी का आभार
रावण के संहार को लिए राम अवतार

चित्रकूट, श्रृंग्वेरपुर, भारद्वाज के राम
जिस पथ में पग राम के समझो चारो धाम

रामचरित किसने लिखा गोस्वामी के बाद
मौलिकता के सामने टिका कहाँ अनुवाद

सिंहासन जिसको मिला उसे हुआ अभिमान
त्रेता में भाई भरत सिर्फ रख सके मान

गंगा, जमुना, नर्मदा या सरयू के तीर
सबके अपने पुण्य हैँ सबकी अपनी पीर

संतों, ऋषियों का ऋणी यह आर्यों का देश
हमें दे गए ज्ञान का वैभव युक्त प्रदेश

कवि जयकृष्ण राय तुषार

सभी चित्र साभार गूगल 

राधा कृष्ण 


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