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चित्र -गूगल से साभार |
एक गीत -यह मिट्टी हिन्दुस्तान की
इस मिट्टी का क्या कहना
इस मिट्टी का क्या कहना
यह मिट्टी हिन्दुस्तान की |
यह गुरुनानक ,तुलसी की है
यह दादू ,रसखान की |
इसमें पर्वतराज हिमालय ,
कल-कल झरने बहते हैं ,
इसमें सूफ़ी ,दरवेशों के
कितने कुनबे रहते हैं ,
इसकी सुबहें और संध्यायें
हैं गीता ,कुरआन की |
यहाँ कमल के फूल और
केसर खुशबू फैलाते हैं ,
हम आज़ाद देश के पंछी
नीलगगन में गाते हैं ,
इसके होठों की लाली है
जैसे मघई पान की |
सत्य अहिंसा ,दया ,धर्म की
आभा इसमें रहती है ,
यही देश है जिसमें
गंगा के संग जमुना बहती है ,
अपने संग हम रक्षा करते
औरों के सम्मान की |
गाँधी के दर्शन से अब भी
इसका चौड़ा सीना है ,
अशफाकउल्ला और भगत सिंह
का यह खून -पसीना है ,
युगों -युगों से यह मिट्टी है
स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाए.......सुन्दर.... राष्ट्र प्रेम से सराबोर गीत बधाईयाँ जी राय साहब /
ReplyDeleteदेशप्रेम के भाव लिए सुंदर गीत... शुभकामनायें
ReplyDeleteबहुत खूबसूरत रचना………………स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं !
ReplyDeleteयह गीत भी बड़ा प्यारा है।
ReplyDeleteवाकई इस मिटटी में कुछ तो कमाल है...अब विदेशी नहीं अंदरूनी समस्याएं हैं...इतने गद्दारों के रहते भी ये देश तरक्की कर रहा है...कुछ बात तो है जो हस्ती मिटती नहीं हमारी...पर हम कहाँ होते अगर...हम मानवीय मूल्यों को अपने जीवन में समाहित कर पाते...बहुत खूब...
ReplyDeleteसत्य अहिंसा ,दया ,धर्म की
आभा इसमें रहती है ,
यही देश है जिसमें
गंगा के संग जमुना बहती है ,
अपने संग हम रक्षा करते
औरों के सम्मान की |
इस मिट्टी में इतिहासों की महक है।
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