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| चित्र -गूगल सर्च इंजन से साभार |
कैसे लिख दें
शाम सुहानी
इतना ऊँचा तापमान है |
प्यासी चिड़िया
लौट रही है गुमसुम
सूखे हुए ताल से ,
अँजुरी भर थे
फूल उन्हें भी
हवा उड़ा ले गई डाल से ,
बाहर भी
आंधियां तेज हैं
अंदर भी ठहरा उफान है |
इच्छाओं के
पांव थक गये
पथरीली राहों में चलते ,
हमको बस
जुगनू दिखलाकर
मौसम के हरकारे छलते ,
झोपड़ियों में
स्याह रात है
महलों में बस दीपदान है |
इत्र नहीं अब
महज पसीने
आँसू से भींगा रुमाल है ,
अम्मां ने
खत लिखकर पूछा
बेटा कैसा हालचाल है ,
परीकथाओं वाले
सपनों में अब
केवल बियाबान है |
बहुत दिन हुए
चंदा देखे
पानी की लहरों को गिनते ,
लुकाछिपी का
खेल खेलते
चरवाहों की वंशी सुनते ,
इन्द्रधनुष की
आभा मद्धम
धुँआ -धुँआ सा आसमान है |

