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चित्र -गूगल सर्च इंजन से साभार |
इस दुरूह
मौसम में खुशबू ,
फूलों का खिलना |
प्यासे हिरना को
मरुथल में
झीलों का मिलना |
उमस भरे
मौसम लू -लपटों में
आलस जीते ,
एक पत्र
लिखने में मुझको
दिन कितने बीते ,
शाम ढले
मखमली घास पर
पाँवों का जलना |
अनदेखा सा
कोई छत पर
दुनियाँ देख रहा ,
कोई मद्धम -
आंच तवे पर
रोटी सेंक रहा ,
आंच तवे पर
रोटी सेंक रहा ,
देख रही माँ
घुटने के बल
बच्चे का चलना |
बहुत दिन हुए
पगडंडी पर
मिली न टूटी पायल ,
बहुत दिन हुए
देखे तिरछी
आँखों का काजल ,
किसी मोड़ पर
आँखों का झुकना
झुककर मिलना |
आदमकद
दरपन में कोई
टिकुली साट गया ,
अपने हिस्से का
सारा सुख
हमको बाँट गया ,
सीख गए
हम कानाफूसी
होठों का सिलना |
मेरे गीत
हवा बनकर
हर मौसम बहते हैं ,
झाँको तो
जैसे झीलों में
बादल रहते हैं ,
उंघते हुए
कमल फूलों का
बहुत दिन हुए
ReplyDeleteपगडंडी पर
मिली न टूटी पायल ,
बहुत दिन हुए
देखे तिरछी
आँखों का काजल ,
किसी मोड़ पर
आँखों का झुकना
झुककर मिलना |
आदमकद
दरपन में कोई
टिकुली साट गया ,
अपने हिस्से का
सारा सुख
हमको बाँट गया ,
सीख गए
हम कानाफूसी
होठों का सिलना |
Bahut,bahut sundar!
खूबसूरत गीत .. बहुत सुन्दर
ReplyDeleteweather par .thanks
ReplyDeletevery very thanks.
ReplyDeleteअद्भुत...अद्भुत...वाह...बहुत सुन्दर भावों को शब्दों दिए हैं आपने...आपके लेखन का कमाल है ये...बहुत ही अच्छी रचना..बधाई स्वीकारें
ReplyDeleteनीरज
खूबसूरत गीत...सुन्दर प्रस्तुति...बधाई.
ReplyDeleteउमस भरे
ReplyDeleteमौसम लू -लपटों में
आलस जीते ,
एक पत्र
लिखने में मुझको
दिन कितने बीते ,
शाम ढले
मखमली घास पर
पाँवों का जलना |
अनदेखा सा
कोई छत पर
दुनियाँ देख रहा ,
कोई मद्धम -
आंच तवे पर
रोटी सेंक रहा ,
देख रही माँ
घुटने के बल
बच्चे का चलना |
वाह वाह
लाजवाब
कमाल करते हैं,,, क्या जादूगरी है
बेमिसाल
आदमकद
ReplyDeleteदरपन में कोई
टिकुली साट गया ,
अपने हिस्से का
सारा सुख
हमको बाँट गया ,
सीख गए
हम कानाफूसी
होठों का सिलना |
सुन्दर कोमल अहसास...बहुत सुन्दर भावपूर्ण रचना
shbdon ko kya khoobsurati se gutha hai aapne..kuch rang khil se gaye phir !
ReplyDeleteआप सभी का हृदय से आभार ब्लॉग पर आने और अपनी बहुमूल्य टिप्पणी देने के लिए |
ReplyDeleteबहुत सुन्दर खूबसूरत गीत ..ह्रदय में उतर गयी...
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