Monday, October 3, 2011

एक प्रेम गीत -बीत गया दिन मौसम को पढ़ते

चित्र -गूगल सर्च इंजन से साभार 
बीत गया दिन मौसम को पढ़ते -एक गीत 
खुली किताबें 
बीत गया दिन 
मौसम को पढ़ते |
अनगढ़ 
चट्टानों में बैठे 
तुमको हम गढ़ते |

कभी अजंता 
कभी एलोरा 
खजुराहो आये ,
लेकिन तेरा 
रम्य रूप हम 
कहीं नहीं पाये ,

शीशे मिले 
खरोचों वाले 
कहाँ तुम्हें मढ़ते |

कहीं महकते 
फूल कहीं पर 
उगे कास ,बढ़नी ,
हिरन न भटके 
पीछे मुड़कर 
देख रही हिरनी ,

प्यास देखती 
रही झील को 
पर्वत पर चढ़ते |

हरी घास पर 
बैठी चिड़िया 
खुजलाती पाँखें ,
सतरंगी 
सपनों में उलझी 
दो  जोड़ी ऑंखें ,

इच्छाओं के 
रूमालों पर 
फूलों सा कढ़ते |

बंजारन का 
बोझ न उतरे 
सपने अभी कुंवारे ,
मन के जंगल 
हमीं अकेले 
किसको करे इशारे ,

हाथ थामकर 
संग -संग उसके 
हम आगे बढ़ते |
चित्र -गूगल सर्च इंजन से साभार 

17 comments:

  1. बहुत ही सुन्दर गीत ..आपको भी दशहरा की ढेरों शुभकामनाएँ

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  2. Kya kahun...Is giit se man gadgad ho gaya...bahut hi sundar giit. Badhai aur Dhashhare ki agrim shubhkaaamnayen

    Neeraj

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  3. सुन्दर भाव और अनंत चाह

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  4. इच्छाओं के
    रूमालों पर
    फूलों सा कढ़ते |


    कमाल धमाल बेमिसाल
    बहुत प्यारा गीत है

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  5. सुन्दर सा प्यारा रूमानी गीत ...याद आ गए सोम ....
    एक पल तेरे ही मीठे संदर्भ का
    सारा दिन गीत गीत हो चला

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  6. सुंदर अभिव्यक्ति .
    आप को भी दशहरे की शुभकामनाये .

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  7. नदी की बलखाती लहरों सा प्रवाहमान सुन्दर गीत |
    हर बंद सुन्दर सा चित्र उकेर कर रख देता है ......बिम्बों और शब्द चयन का क्या कहना !
    भाव और शिल्प ....दोनों से परिपूर्ण..

    geet padhna hota hai to aapke blog par aa jata hoon.

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  8. मधुर रचना है ... प्रेम शृंगार की ताजगी लिए ...

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  9. तुषार जी आपका यह गीत बार बार पढने को मन करता है
    दशहरे की हार्दिक शुभकामनाये

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  10. विजया दशमी की हार्दिक शुभकामनाएं। बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक यह पर्व, सभी के जीवन में संपूर्णता लाये, यही प्रार्थना है परमपिता परमेश्वर से।
    नवीन सी. चतुर्वेदी

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  11. aap hamesha se hi kamaal ka likhte hai...aur aaj bhi!

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  12. बहुत -बहुत सम्मान सुन्दर सृजन को, भवनाये की उभय हो मुखर हो गयीं हैं .... विवसता है की लिख कर भी नहीं लिख पा रहे हैं , शुभकामनायें जी /

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  13. हरी घास पर
    बैठी चिड़िया
    खुजलाती पाँखें ,
    सतरंगी
    सपनों में उलझी
    दो जोड़ी ऑंखें ,

    इच्छाओं के
    रूमालों पर
    फूलों सा कढ़ते |

    _____________________

    BADHIYA

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