Thursday, 4 June 2026

एक देशगान -गीता के वैभव को समझो

 

भारत माता चित्र साभार गूगल 

एक देशगान -गीता के वैभव को समझो 


षड़यंत्र विदेशी 

गहरा है 

बस मातृभूमि से प्यार करो.

भारत माँ 

अपराजेय रहे 

अब सरहद पर यलगार करो.


सत्ता के लोभी 

शकुनि सभी 

दुश्मन से हाथ मिलाते हैं,

भारत की मिट्टी में 

जन्मे गद्दार 

हमें धमकाते हैं,

हे कल्कि 

अवतरण लो जल्दी 

इस धरती का उद्धार करो.


कुछ राष्ट्र विधर्मी 

दुनिया को 

हर क्षण संकट में डाल रहे,

उन्मादी, आतंकी 

राक्षस 

विष कन्याओं को पाल रहे,

गीता के 

वैभव को समझो 

अर्जुन फिर प्रबल प्रहार करो.


मतभेद स्वार्थ से 

दूर रहो 

बस राष्ट्र धर्म की जय बोलो,

डमरू, त्रिशूल ले

हाथों में 

हे नीलकंठ ऑंखें खोलो,

तांडव नर्तन की 

ज्वाला से 

फिर असुरों का संहार करो.


कवि -जयकृष्ण राय तुषार 

शिव तांडव 


4 comments:

  1. देश की भक्ति से बढ़कर भला और क्या हो सकता है।
    यलगार करो...।
    सादर।
    ------
    जी नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना शुक्रवार ५ जून २०२६ के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    सादर
    धन्यवाद।

    ReplyDelete
  2. सुंदर सृजन

    ReplyDelete

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