ग़ज़ल संग्रह "सियासत भी इलाहाबाद में संगम नहाती है"की समीक्षा आज अमर उजाला में साहित्यिक पेज मनोरंजन में छपी है. लेखक श्री श्री चित्रसेन रजक जी सम्पादक श्री देव प्रकाश चौधरी जी का हृदय से आभार
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चलो मुश्किलों का हल ढूंढे खुली किताबों में
आदरणीय श्री रमेश ग्रोवर जी और श्री आमोद माहेश्वरी जी एक पुराना गीत सन 2011 में लिखा गया चलो मुश्किलों का हल ढूँढें खुली किताबों में मित्...
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चित्र साभार गूगल एक गीत -मोरपँखी गीत इस मरुस्थल में चलो ढूँढ़े नदी को मीत. डायरी में लिखेंगे कुछ मोरपँखी गीत. रेत में पदचिन्ह होंगे ...
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लाल किला -चित्र गूगल से साभार एक देशगान -कितना सुन्दर, कितना प्यारा देश हमारा है कितना सुंदर कितना प्यारा देश हमार...
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चित्र साभार गूगल एक ताज़ा गीत -सारा जंगल सुनता है चित्र साभार गूगल चिड़िया जब गाती है मन से सारा जंगल सुनता है. नए बाग में नए फूल जब विव...


