Friday, 11 March 2022

एक ग़ज़ल -उससे मिलने का बहाना है ग़ज़ल

 

चित्र साभार गूगल

एक ग़ज़ल-उससे मिलने का बहाना है ग़ज़ल


कुछ हक़ीकत कुछ फ़साना है ग़ज़ल

धूप में इक शामियाना है ग़ज़ल


प्यास होठों की इबादत इश्क की

दिल के लफ़्ज़ों का खज़ाना है ग़ज़ल


चाँद, सूरज,आसमाँ कुछ भी नहीं

उससे मिलने का बहाना है ग़ज़ल


धूप,साया,खुशबुएँ, बारिश,हवा

मौसमों का भी ठिकाना है ग़ज़ल


दर्द,तनहाई, ग़रीबी, मुफ़लिसी

सरफ़रोशी का तराना है ग़ज़ल

कवि जयकृष्ण राय तुषार

चित्र साभार गूगल




11 comments:

  1. जी नमस्ते ,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (१२ -०३ -२०२२ ) को
    'भरी दोपहरी में नंगे पाँवों तपती रेत...'(चर्चा अंक-४३६७)
    पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है।
    सादर

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    1. आदरणीया अनिता जी आपका हृदय से आभार

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  2. चाँद, सूरज,आसमाँ कुछ भी नहीं
    उससे मिलने का बहाना है ग़ज़ल//
    बहुत प्यारीऔर माधुर्य भरी गजल तुषार जी।हमेशा की तरह शानदार रचना।

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    1. आपका हृदय से आभार।सादर अभिवादन रेणु जी।

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  3. हार्दिक आभार आपका भाई

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  4. सुन्दर प्रस्तुति.

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    1. हार्दिक आभार आपका।सादर प्रणाम

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  5. शानदार ग़ज़ल!
    हर शेर लाजवाब।

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    1. हार्दिक आभार आपका।सादर अभिवादन

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  6. बहुत खूबसूरत ग़ज़ल

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    1. हार्दिक आभार आपका।सादर अभिवादन

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