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| चित्र साभार गूगल |
एक ताज़ा गीत -फूलों में इतवार
गीत, पपीहा
बांसुरी
वासंती श्रृंगार.
प्रेमगीत
लिखने लगा
फूलों में इतवार.
पीली -नीली
चिट्ठियां
वन में पढ़े पलाश,
नदी किनारे
खाट पर
मौसम खेले ताश,
सुबह
हवा में उड़ रहे
मेजों से अख़बार.
तन्हा बैठे
फूल को
फिर तितली की याद,
मौन मुखर
करने लगा
आँखों से संवाद,
राधे राधे
बोलते
वृन्दावन, गिरिनार.
पीली सरसों
देखकर
प्रमुदित हुए किसान,
तुलसी का
मानस खुला
ग़ालिब का दीवान,
सारंगी
शहनाइयां
बजने लगे सितार.
कवि /गीतकार
जयकृष्ण राय तुषार
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| चित्र साभार गूगल |


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