Sunday, 25 July 2021

एक गीत-महीयसी महादेवी वर्मा के लिए

महीयसी महादेवी वर्मा


एक गीत-

महीयसी महादेवी वर्मा को समर्पित


आधुनिक मीरा

महादेवी थीं

छायावाद की ।

काव्य संगम

की सरस्वती

वह इलाहाबाद की।


गीत,निबन्ध

कहानियों से

सजीं सुन्दर दीपमाला,

घन तिमिर में

चाँदनी बनकर

रहीं देती उजाला,

'सप्तपर्णा'

कृति अनूठी

काव्य के अनुवाद की ।


सदा चिन्ता

स्त्रियों के

मान और सम्मान की,

वह थीं

शुभचिंतक,निराला

पंत से दिनमान की,

दार्शनिक

चिंतन,कभी

कविता लिखीं अवसाद की।


मोर,गिल्लू 

और गौरा से

अनूठा प्यार उनका,

खग-विहग

कुछ फूल,तितली

बन गए परिवार उनका,

जिन्दगी भर

रही कोशिश

प्रकृति से संवाद की ।


कवि-जयकृष्ण राय तुषार

3 comments:

आपकी टिप्पणी हमारा मार्गदर्शन करेगी। टिप्पणी के लिए धन्यवाद |

एक गीत-चाँदनी निहारेंगे

  चित्र साभार गूगल एक गीत-चाँदनी निहारेंगे रंग चढ़े मेहँदी के मोम सी उँगलियाँ हैं । धानों की मेड़ों पर मेघ की बिजलियाँ हैं। खुले हुए जूड़े और ब...